

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश स्पोर्ट्स कॉलेज सोसाइटी की स्थापना 1975 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा प्रदेश के विभिन्न कोनों से खेल प्रतिभाओं को चयनित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके तहत लखनऊ, गोरखपुर, देहरादून और सैफई में खेल छात्रावासों की शुरुआत हुई।
1975 से 2010 तक, इन कॉलेजों ने कई होनहार खिलाड़ियों को तैयार किया, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया। हालांकि, 2010 के बाद से, स्पोर्ट्स कॉलेजों में नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं हो सकी, जिससे कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के कार्यकाल में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए।
उदाहरणस्वरूप, गुरु गोबिंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ में कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और खेल निदेशालय से जवाब मांगा था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवेश प्रक्रिया में हेरफेर, निर्धारित संख्या से अधिक प्रवेश, और फीस में अनियमितताएं हुई हैं। खेल निदेशक द्वारा 2015 में की गई जांच में संयुक्त निदेशक खेल और वर्तमान कार्यवाहक प्रधानाचार्य सहित कुछ अन्य लोग दोषी पाए गए थे, लेकिन मामले को दबा दिया गया था।
वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। हाल ही में, इन्वेस्ट यूपी के सीईओ और लखनऊ के पूर्व जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश को घूसखोरी के आरोप में निलंबित किया गया है। उन पर सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन करने वाले एक उद्यमी से कमीशन मांगने का आरोप है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति अपने परिवार में सरकारी नौकरी करने वाला आखिरी व्यक्ति होगा।
स्पोर्ट्स कॉलेज सोसाइटी को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए एक स्थायी और सक्षम प्रधानाचार्य की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। ऐसा प्रधानाचार्य न केवल छात्रों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए मार्गदर्शन भी करेगा। इसके अलावा, प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि प्रदेश के खेल प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन और संसाधन मिल सकें, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
हाई कोर्ट ने भी स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति के लिए निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है। यदि यह नियुक्ति हो जाती है, तो बंट जोहे स्पोर्ट्स कॉलेज को स्थायी प्रधानाचार्य मिल जाएगा और उसकी खोई हुई साख दोबारा प्राप्त हो सकेगी। इससे कॉलेज के छात्र एक बार फिर खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर सकेंगे। अब देखना है कि शासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है—क्या वह अस्थायी प्रधानाचार्य की व्यवस्था जारी रखता है या स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति करता है।