
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित डी.ए.वी. महाविद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव ‘अभिव्यक्ति–२०२६’ का शुभारंभ अत्यंत भव्य, शालीन और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। ज्ञान, कला और साहित्य की समृद्ध परंपराओं से आलोकित इस आयोजन में प्रख्यात साहित्यिक व्यक्तित्व अशोक वाजपेयी का आगमन जैसे पूरे परिसर में नवचेतना का संचार कर गया। सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के मध्य एक विशेष उत्सुकता और आत्मीय उल्लास का वातावरण स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा रहा था।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक पुष्पार्पण तथा महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक स्वर्गीय पंडित मनमोहन तिवारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि अशोक वाजपेयी के साथ महाविद्यालय के प्रबंधक आनंद मोहन तिवारी, प्रबंध समिति के अध्यक्ष सत्यकाम आर्य, सुधा शर्मा, पूर्व प्राचार्य अंजनी मिश्रा, के.के. पांडेय, वर्तमान प्राचार्य राजीव कुमार त्रिपाठी तथा कार्यक्रम के संयोजक सुधीर कुमार शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट गौरव प्रदान किया।
इसके उपरांत महाविद्यालय के प्राचार्य राजीव कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं विशिष्ट उपहार भेंट कर अभिनंदन किया। यह सम्मान केवल औपचारिक आदर नहीं, बल्कि उस साहित्यिक साधना के प्रति श्रद्धा का प्रतीक था जिसने दशकों से भारतीय सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध किया है। प्राचार्य ने अपने स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं और विद्यार्थियों की सृजनात्मक ऊर्जा का उल्लेख करते हुए इस आयोजन को बौद्धिक उत्सव की संज्ञा दी।
इसके पश्चात प्रबंध समिति के अध्यक्ष सत्यकाम आर्य ने ‘अभिव्यक्ति–२०२६’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने तथा उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाने का माध्यम बनते हैं। उनके विचारों ने सभागार में उपस्थित युवाओं के मन में नई प्रेरणा का संचार किया।
कार्यक्रम के अगले क्रम में पूर्व प्राचार्य के.के. पांडेय तथा अंजनी मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए महाविद्यालय की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक चेतना की निरंतरता को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन और रचनात्मकता के मार्ग पर अग्रसर रहने का संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है।
जब मुख्य अतिथि अशोक वाजपेयी ने अपने उद्बोधन के लिए मंच संभाला, तब सभागार में एक अद्भुत निस्तब्धता छा गई। अपने ओजस्वी और भावपूर्ण शब्दों में उन्होंने महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक पंडित मनमोहन तिवारी के साथ अपने आत्मीय संबंधों की स्मृतियों को साझा किया। उनके वक्तव्य में साहित्य, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का ऐसा समन्वय था जिसने उपस्थित श्रोताओं को गहरे तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने की प्रक्रिया है।
उन्होंने वर्तमान प्रबंधक आनंद मोहन तिवारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ‘अभिव्यक्ति’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल मंच नहीं देते, बल्कि उनके भीतर छिपी प्रतिभा को उजागर करने का अवसर प्रदान करते हैं। उनके विचारों ने विद्यार्थियों के मन में सृजनात्मकता के प्रति नई प्रेरणा का संचार किया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में आनंद मोहन तिवारी ने मंचासीन अतिथियों का अभिनंदन करते हुए विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान तभी जीवंत रहते हैं जब उनमें ज्ञान के साथ-साथ संस्कृति और रचनात्मकता का भी समुचित विकास होता रहे।
कार्यक्रम के संयोजक सुधीर कुमार शुक्ल ने अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा वार्षिकोत्सव के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं की रूपरेखा से अवगत कराया।
वार्षिकोत्सव ‘अभिव्यक्ति–२०२६’ के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। स्वरचित कविता पाठ, वृत्तचित्र निर्माण, स्वप्न चित्रांकन, वाद–विवाद तथा मेहंदी कला जैसी प्रतियोगिताओं में अनेक महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। इन प्रतियोगिताओं ने यह प्रमाणित किया कि युवा पीढ़ी के भीतर सृजनात्मक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता का विशाल भंडार निहित है।
कार्यक्रम के संयोजक ने जानकारी दी कि सभी प्रतियोगिताओं के परिणाम सुरक्षित कर लिए गए हैं तथा उनकी घोषणा वार्षिकोत्सव के समापन दिवस १२ मार्च को की जाएगी। उस अवसर पर विजेताओं को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।
पूरे आयोजन के दौरान सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों की उत्सुकता, प्रतिभागियों का आत्मविश्वास और विद्वानों का मार्गदर्शन यह संकेत दे रहा था कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, सृजनशीलता और विचारों की उन्नत परंपरा का संवाहक है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह को भी इस गरिमामय समारोह में मंच साझा करने के लिए विशेष आमंत्रण प्रेषित किया गया था। किंतु पूर्वनिर्धारित दिल्ली प्रवास के कारण उनका कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होना संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने दूरभाष तथा मीडिया के माध्यम से अपने संदेश प्रेषित करते हुए डी.ए.वी. महाविद्यालय परिवार, आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित कीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक एवं बौद्धिक आयोजन किसी भी शिक्षण संस्थान की जीवंतता और रचनात्मक चेतना के प्रतीक होते हैं, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से आयोजकों के परिश्रम और समर्पण की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ‘अभिव्यक्ति–२०२६’ जैसे आयोजन युवा पीढ़ी के भीतर निहित प्रतिभा को राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सृजनात्मक दृष्टि से समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए महाविद्यालय परिवार को साधुवाद देते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ भी प्रेषित कीं।
