नारी शक्ति का शंखनाद: ‘समर्थ नारी-समर्थ भारत’ के सप्तम स्थापना दिवस पर वैचारिक क्रांति का आह्वान

अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में गरिमामयी उपस्थिति के बीच संगठन की पत्रिका का विमोचन और विभूतियों का सम्मान

  • राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की 50 प्रतिशत राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की उठी मांग

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 30 मार्च 2026।
अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के प्रेक्षागृह में ‘समर्थ नारी-समर्थ भारत’ संगठन द्वारा अपने सातवें स्थापना दिवस एवं हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य और वैचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय स्तर पर महिलाओं के उत्थान हेतु समर्पित इस संगठन के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पावन अनुष्ठान के साथ हुआ। इस अवसर पर संगठन की आधिकारिक पत्रिका का विमोचन भी संपन्न हुआ, जो नारी चेतना के विभिन्न आयामों को समाहित करती है।

विशिष्ट विभूतियों का समागम और सम्मान

  • कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री (MSME) माननीय राकेश सचान जी, लखनऊ पूर्वी के विधायक माननीय ओम प्रकाश श्रीवास्तव जी, विधान परिषद सदस्य इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह जी, वरिष्ठ भाजपा नेता श्री सुधीर हलवासिया जी एवं डिवाइन हार्ट अस्पताल की कार्यकारी निदेशक श्रीमती आभा श्रीवास्तव जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सेवा और समर्पण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित करने वाली तीन विशिष्ट नारियों— श्रीमती विनिता पांडे जी, श्रीमती वंदना श्रीवास्तव जी एवं श्रीमती किरण शुक्ला जी को उनकी अप्रतिम सेवाओं हेतु सम्मानित किया गया।

वैचारिक अधिष्ठान: ‘सशक्तिकरण मात्र उद्घोष नहीं, विकास का मूलाधार’

संगठन की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती नीरा सिन्हा ‘वर्षा’ ने अपने ओजस्वी संबोधन में समाज की विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कहा:

“महिला सशक्तीकरण केवल एक सतही नारा नहीं, अपितु राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। प्रगतिशील भारत में पर्दा प्रथा जैसी कुरीतियाँ और संकीर्ण शिक्षण संस्थान (मदरसे) अप्रासंगिक हैं। सामाजिक एवं प्रशासनिक तंत्र को किसी भी निर्णय से पूर्व गहन द्वि-स्तरीय जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि निर्दोष परिवारों का उत्पीड़न न हो।”

उन्होंने न्याय प्रक्रिया की समयबद्धता और राजनीति में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की पुरजोर वकालत करते हुए इसे ‘आधी आबादी’ का नैसर्गिक अधिकार बताया।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की मनमोहक छटा वैचारिक विमर्श के उपरांत सांस्कृतिक अनुष्ठान के अंतर्गत ‘शिव तांडव’ की ओजपूर्ण प्रस्तुति हुई। चित्रा मोहन द्वारा लिखित एकल नाट्य ‘मंथरा: एक पुनर्पाठ’ का संध्या रस्तोगी ने भावपूर्ण मंचन किया। लखनऊ सांस्कृतिक अध्यक्षा अनुपमा श्रीवास्तव के निर्देशन में ‘दशावतार’ सामूहिक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुनीता अवस्थी और संध्या रस्तोगी द्वारा अभिनीत लघु नाटिका ‘अलग-अलग दर्पण’ ने सामाजिक विद्रूपताओं को उजागर किया। कार्यक्रम का समापन ‘नृत्यांगन डांस इंस्टीट्यूट’ द्वारा प्रस्तुत ‘फूलो की होली’ के अलौकिक दृश्य के साथ हुआ।

कार्यक्रम का कुशल संचालन उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक अध्यक्षा श्रीमती पुनीता अवस्थी ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय महासचिव प्रिया वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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