
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं- जितेंद्र प्रताप सिंह
दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। महाशिवरात्रि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का वह परम पावन उत्सव है, जिसमें साधना, संयम और समर्पण का अद्वितीय समन्वय प्रत्यक्ष होता है। यह केवल एक पर्व नहीं, अपितु आत्मानुशीलन, तत्त्वचिंतन और ईश्वर के साथ तादात्म्य स्थापित करने का दिव्य अवसर है। इस रजनी में शिवतत्त्व की आराधना के माध्यम से साधक अपने अंतःकरण की शुद्धि, चित्त की एकाग्रता तथा जीवन की आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प धारण करता है। शिव, जो सृष्टि के संहारक ही नहीं अपितु पुनर्सृजन के अधिष्ठाता भी हैं, विरक्ति में स्थित होकर भी समस्त विश्व के कल्याण का व्रत धारण करते हैं। उनकी उपासना मानव को त्याग, करुणा, धैर्य और धर्मनिष्ठा के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करती है।
इसी पावन अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने समस्त भारतवासियों को महाशिवरात्रि की हृदयंगम शुभकामनाएँ एवं मंगलाशंसाएँ प्रेषित की हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और आत्मोद्धार का महापर्व है, जो मानव को बाह्य आडंबरों से परे जाकर अंतर्मन की दिव्यता को जाग्रत करने का संदेश देता है। उन्होंने आह्वान किया कि इस रात्रि में प्रत्येक व्यक्ति शिवनाम-स्मरण, रुद्राभिषेक, उपवास एवं ध्यान के माध्यम से अपने जीवन को सत्पथ पर अभिसिंचित करे।
श्री सिंह ने यह भी कहा कि वर्तमान युग में जब सामाजिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियाँ उभर रही हैं, तब शिव का आदर्श—वैराग्य में स्थित रहकर भी लोकमंगल का संकल्प—हमारे लिए अनुकरणीय है। महादेव का नीलकंठ स्वरूप हमें यह शिक्षा देता है कि विषम परिस्थितियों के विष को धारण कर भी समाज में अमृततुल्य सद्भाव, समरसता और शांति का संचार किया जा सकता है।
अपने शुभकामना संदेश के अंत में उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से राष्ट्र में धर्म, सदाचार और सांस्कृतिक चेतना का पुनरुत्थान हो तथा प्रत्येक परिवार सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति से आलोकित हो। महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व समस्त भारतवर्ष के लिए नवचेतना, नवसंकल्प और नवप्रभात का द्योतक बने—इसी मंगलकामना के साथ उन्होंने सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभाशंसाएँ अर्पित कीं।
