
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। राष्ट्रीय एक्यूपंक्चर दिवस के पावन उपलक्ष्य में विकास नगर स्थित एपेक्स एक्यूपंक्चर सेंटर एंड पेन क्लीनिक में एक विशाल निःशुल्क समन्वित चिकित्सा शिविर का आयोजन संपन्न हुआ। प्रातः १० बजे से सायं ४ बजे तक संचालित इस स्वास्थ्य-अभियान ने न केवल उपचार, बल्कि जन-जागरण और समग्र स्वास्थ्य-संवर्धन का संदेश भी प्रसारित किया।

शिविर का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ जी. पार्थ प्रतिम द्वारा भगवान धन्वंतरि तथा भारत में एक्यूपंक्चर पद्धति के प्रवर्तक डॉ बिजॉय कुमार बसु के चित्रों पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि एक्यूपंक्चर केवल उपचार-पद्धति नहीं, अपितु शरीर की अंतर्निहित ऊर्जा-संरचना को संतुलित करने की वैज्ञानिक एवं प्राचीन विधा है, जो औषधि-निर्भरता को न्यूनतम करते हुए स्वाभाविक आरोग्यता को प्रोत्साहित करती है।
शिविर में एक्यूपंक्चर, फिजियोथेरेपी, दंत-चिकित्सा, बीएमआई परीक्षण, स्वास्थ्य परामर्श तथा पैथोलॉजिकल जाँच जैसी बहुआयामी सेवाएँ प्रदान की गईं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क, माइग्रेन, न्यूरोपैथी, अवसाद, अनिद्रा तथा आर्थराइटिस जैसी जटिल एवं दीर्घकालिक व्याधियों से पीड़ित लगभग ४५ पंजीकृत रोगियों ने निःशुल्क परीक्षण एवं उपचार का लाभ प्राप्त किया।
रोगियों का उपचार एक्यूपंक्चर, इलेक्ट्रो-एक्यूपंक्चर, मोक्सीबस्टन, कपिंग तथा फिजियोथेरेपी जैसी विविध उपचार-विधियों के माध्यम से किया गया। चिकित्सकीय टीम ने प्रत्येक रोगी की अवस्था का सूक्ष्म परीक्षण कर व्यक्तिगत उपचार-योजना तैयार की, जिससे उन्हें त्वरित एवं प्रभावकारी लाभ प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर डॉ सुमित श्रीवास्तव, डॉ जहांनारा खान, डॉ नजमा, डॉ संदीप बिस्वास, डॉ अखिलेश प्रकाश सहित कृष्ण कुमार, अब्दुल कादिर, अलमान, नीलम, अरुणा, प्रणात, सलमा तथा चंदन हॉस्पिटल की सलोनी ने सेवा-भाव से सहभागिता निभाई। चिकित्सा-सेवा में समर्पित यह समवेत प्रयास मानवीय करुणा और व्यावसायिक दक्षता का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
निदेशक डॉ जी. पार्थ प्रतिम ने अवगत कराया कि शिविर में पंजीकृत रोगियों को आगामी दिवस से नियमित उपचार सेवाएँ पचास प्रतिशत रियायत के साथ उपलब्ध कराई जाएँगी, जिससे अधिकाधिक लोग इस समन्वित चिकित्सा-पद्धति का लाभ प्राप्त कर सकें।
निस्संदेह, यह आयोजन केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता, विश्वास और जनकल्याण की दिशा में एक सार्थक एवं संवेदनशील पहल सिद्ध
