
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष Jitendra Pratap Singh ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi से शिष्टाचार भेंट कर राष्ट्रहित से जुड़े विविध विषयों पर अत्यंत गंभीर, सारगर्भित और दूरदर्शी संवाद किया। इस अवसर पर देश की खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण तथा उपभोक्ता हितों के संवर्धन से जुड़े विषयों पर भी विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श हुआ।
भेंट के दौरान श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राष्ट्र में उपभोक्ता संरक्षण केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनविश्वास और आर्थिक संतुलन का मूलाधार है। उन्होंने कहा कि बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना समय की महती आवश्यकता है, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें और उन्हें किसी भी प्रकार के आर्थिक अथवा गुणवत्ता संबंधी शोषण का सामना न करना पड़े।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा खाद्यान्न भंडारण क्षमता को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पहल देश की खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने वाली है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि भंडारण व्यवस्था सुदृढ़ होगी तो कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी और अंततः इसका लाभ सीधे देश के उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा।
ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण की सुदृढ़ व्यवस्था ही स्वस्थ आर्थिक तंत्र की आधारशिला होती है। जब उपभोक्ता को यह विश्वास होता है कि उसे गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ और सेवाएँ प्राप्त होंगी तथा उसके अधिकारों की रक्षा के लिए सशक्त तंत्र उपलब्ध है, तभी बाजार व्यवस्था संतुलित और न्यायपूर्ण बनती है।
इस अवसर पर श्री सिंह ने मीडिया के माध्यम से केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि राष्ट्रहित, उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके मार्गदर्शन में देश की भंडारण व्यवस्था और उपभोक्ता संरक्षण तंत्र दोनों और अधिक सुदृढ़ होकर राष्ट्र की आर्थिक संरचना को नई शक्ति प्रदान करेंगे।
भेंट के दौरान राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर भी सकारात्मक और रचनात्मक विचार-विमर्श हुआ। यह भेंट राष्ट्रहित के व्यापक मुद्दों पर संवाद और सहयोग की भावना को सुदृढ़ करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
