लोहिया नगर में भाजपा के 47वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रवाद की चेतना का महाआयोजन, अंत्योदय से ‘राष्ट्र प्रथम’ तक गूंजा संकल्प

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 06 अप्रैल 2026।भारतीय लोकतंत्र के वैचारिक परिदृश्य में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाली भारतीय जनता पार्टी का 47वाँ स्थापना दिवस लोहिया नगर वार्ड में अद्वितीय गरिमा, अनुशासन और वैचारिक ऊष्मा के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन मात्र औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उस दीर्घकालिक वैचारिक साधना का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने सन् 1951 में भारतीय जनसंघ के रूप में अंकुरित होकर आज विश्व के सबसे विशाल राजनीतिक संगठन—भारतीय जनता पार्टी—का विराट वटवृक्ष धारण किया है।

कार्यक्रम का प्रारम्भ राष्ट्रवादी भावभूमि पर आधारित ‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ हुआ—वह दर्शन, जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति को प्रदान किया। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान का यह सिद्धांत आज भी भाजपा की नीतियों का केन्द्रीय तत्व बना हुआ है। इसी क्रम में जनसंघ की वैचारिक क्रांति को स्मरण करते हुए उसके पुरोधाओं को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई—मानो यह उद्घोष किया जा रहा हो कि वर्तमान की हर उपलब्धि, अतीत के तप, त्याग और संघर्ष की ही परिणति है।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ कार्यकर्ता आशुतोष मिश्रा ने अपने सशक्त और संयमित शब्दों से पूरे आयोजन को वैचारिक ऊँचाई प्रदान की। जब लोहिया नगर के पार्षद राकेश कुमार मिश्र को मंच पर आमंत्रित किया गया, तो उनका उद्बोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि विचारों का उद्गार बन गया। उन्होंने कहा कि “47 वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुई विचार क्रांति ने भारतीय राजनीति को न केवल दिशा दी, बल्कि एक सुदृढ़, आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिष्ठ भारत की आधारशिला रखी।” उनके शब्दों में गर्व भी था, कृतज्ञता भी और भविष्य के प्रति अटूट विश्वास भी।

पार्षद ने विशेष रूप से राजनाथ सिंह के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता और स्नेहिल मार्गदर्शन ने लखनऊ को विकास और संगठनात्मक सुदृढ़ता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि “देश की सेवा में सर्वोच्च दायित्व निभाने के बावजूद माननीय जी का प्रत्येक वार्ड, प्रत्येक कार्यकर्ता के प्रति आत्मीय जुड़ाव, भाजपा की कार्यशैली का जीवंत उदाहरण है।” यह कथन सुनते ही सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं के चेहरे गर्व से दमक उठे।

इसके पश्चात मुख्य अतिथि के रूप में पधारे राज्य मंत्री श्री गिरीश चंद्र मिश्रा का संबोधन कार्यक्रम का शिखर बिंदु सिद्ध हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक प्रेरणा और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि यही वह आधार है, जिसने भाजपा को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का व्यापक आंदोलन बना दिया है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के अदम्य चरित्र का स्मरण करते हुए कहा कि “अटल जी ने सिद्ध कर दिया कि सत्ता से बड़ा सिद्धांत होता है—उन्होंने एक वोट के लिए भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया, बल्कि सत्ता का परित्याग करना स्वीकार किया।”

उनके शब्दों में वह स्पष्टता और दृढ़ता थी, जिसने श्रोताओं को गहराई तक प्रभावित किया। उन्होंने आगे कहा कि “यदि कोई सरकार बार-बार जनता के विश्वास से पुनः सत्ता में आती है, तो यह केवल राजनीतिक रणनीति का परिणाम नहीं, बल्कि जनआस्था और विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।” उन्होंने इसे ‘जनादेश का सतत आशीर्वाद’ बताते हुए कहा कि आज नगर से लेकर केंद्र तक भाजपा की ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ इसी विश्वास की परिणति है।
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी दृश्य तब देखने को मिला, जब मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ, माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र से किया गया। इसके साथ ही वार्ड के सभी वरिष्ठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया—यह दृश्य केवल सम्मान का नहीं, बल्कि संगठन के प्रति समर्पण और निष्ठा की सार्वजनिक स्वीकृति का प्रतीक बन गया।

इस अवसर पर लोहिया नगर वार्ड के पार्षद राकेश कुमार मिश्र, उमा मिश्रा, कैलाश नाथ मिश्रा (प्रदेश अध्यक्ष, मानवाधिकार), आशुतोष कुमार मिश्रा (मंडल उपाध्यक्ष), प्रकाश सिंह एवं अनूप शुक्ला (शक्ति केंद्र संयोजक), धर्मेंद्र मिश्रा, डॉ. प्रदीप सिंह, डॉ. सुशील त्रिवेदी, एस.पी. द्विवेदी, प्रमोद मालवीय, पतंजलि अवस्थी, अमोद तिवारी, सर्वेश बाजपेई, अतुल श्रीवास्तव, राजेंद्र गुप्ता, रेखा पंचोली, ऊषा दीक्षित, पूजा शुक्ला, गौरी कश्यप, दीपा अग्रवाल, मोनी तिवारी, किरण मिश्रा, हरीश चंद्र पाण्डेय, संजीव मिश्र, बृजेश तिवारी एवं संजय मिश्रा सहित अनेक गणमान्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को एक जीवंत जनोत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

समापन के क्षणों में वातावरण में एक ही भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था—यह स्थापना दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य के भारत का संकल्प है। ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘अंत्योदय’ के सिद्धांतों पर आधारित यह यात्रा निरंतर गतिमान है, और प्रत्येक कार्यकर्ता इस महायज्ञ का अनिवार्य सहभागी है। लोहिया नगर से उठी यह वैचारिक ज्योति अब दूर-दूर तक प्रकाश फैलाने को तत्पर है।

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