
दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। रुबी रावत जी, जिनके जीवन में कठिनाइयों का पहाड़ खड़ा है, अकेली अपने परिवार का बोझ उठाती आई हैं। उनके पति का निधन हो चुका है, और वे घरों पर भोजन बनाने का काम करके अपने परिवार का गुजर-बसर कर रही हैं। लेकिन उनकी आँखों में अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य का सपना हमेशा जीवित रहा।
रुबी रावत की बड़ी बेटी अंशिता कक्षा-8 में पढ़ती हैं और छोटी बेटी आराध्या कक्षा-5 में पुलिस मॉडर्न स्कूल में। पिछले छह महीनों से आर्थिक तंगी के कारण उनकी फीस जमा नहीं हो पा रही थी—आराध्या की 11,485 रुपये और अंशिता की 17,365 रुपये। हर मां की तरह रुबी जी की चिंता केवल अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की थी।
यह कठिन समय तब बदल पाया जब सेवा भारती, पूरब भाग ने इस चुनौती को अपने कंधों पर उठाया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि रुबी रावत की बेटियों की शिक्षा किसी भी हालत में बाधित न हो।
आराध्या की फीस 11,485 रुपये डॉ. चित्रा सक्सेना जी की मदद से पूरी की गई। अंशिता की फीस 17,365 रुपये के लिए अनेक महानुभावों ने योगदान दिया: श्री राजीव जी, श्रीमती अंजली जी, श्री विपिन सिंह जी, श्री राजकपूर जी, श्री एस.पी. सरन जी, श्री डी.के. श्री जी, शुभम गुप्ता, श्री अक्षत गुप्ता, श्रीमती रीता शर्मा जी, सीमा सिंह जी, अंकिता सिंह जी और अमित मोहन जी। इन सभी की मदद से यह राशि पूरी हुई और रुबी जी की बेटी की पढ़ाई अब सुरक्षित हाथों में है।
सीमा सिंह जी और अंकिता सिंह जी ने राशि सीधे रुबी रावत के बैंक खाते में ट्रांसफर की, जबकि बाकी का चेक सेवा भारती ने रुबी जी को सौंपा। इस सहयोग ने न केवल एक मां के तनाव को दूर किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि समाज में मानवता और भाईचारा अब भी जीवित है।
यह खबर केवल एक आर्थिक मदद की कहानी नहीं है, बल्कि यह मां की अनकही मेहनत, बच्चों के सपनों और समाज की उदारता का प्रतीक है। रुबी रावत और उनकी बेटियों की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब हाथ साथ मिलते हैं, तो कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है।
