


दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ ।भारत खंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ और नव वर्ष चेतना समिति, लखनऊ के संयुक्त तत्वाधान में नूतन वर्षारम्भ के उपलक्ष्य में हिंदू नव वर्ष महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। विगत १६ वर्षों से समर्पण के साथ आयोजित इस महोत्सव के माध्यम से भारतीय कालगणना प्रणाली तथा विक्रम संवत्-आधारित हिंदू पञ्चाङ्ग के महत्व को जनसामान्य तक पहुँचाने एवं भारतीय संस्कृति की जड़ों को प्रगाढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। यह वर्ष अत्यंत विशिष्ट है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी शताबर्षीय यात्रा पूर्ण कर रहा है। बीते सौ वर्षों में, संघ ने अथक परिश्रम, अनुशासन, सेवा एवं संगठन निर्माण के माध्यम से स्वातन्त्र्योत्तर भारत में समाज-सेवा, आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान जागरण एवं राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। इसी क्रम में, वेदों के उपदेश “आत्मानं विद्धि” की सीख को धरोहर मानते हुए भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता को निरंतर प्रज्वलित रखा गया है।

इस ऐतिहासिक वर्ष को स्मरणीय बनाने हेतु नव वर्ष चेतना समिति की वार्षिक पत्रिका “नव चैतन्य” को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, जो संघ की राष्ट्र-निर्माण यात्रा, तपस्या, ऐतिहासिक योगदान एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित है। साथ ही, यह आयोजन वैदिक ज्ञान की अमूल्य शिक्षाओं को भी उजागर करता है, जैसा कि “ॐ सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै” सूत्र में व्यक्त है।
कार्यक्रम का संचालन सुनील अग्रवाल सचिव नव वर्ष चेतना समिति व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में अनंत विभूषित आचार्य मिथलेषनंदनी शरण, पीठाधीश्वर सिद्ध पीठ, हनुमान निवास, अयोध्या ने नव वर्ष के शुभकामना संदेश में दिन-रात एवं ऋतुओं के समन्वय को दर्शाते हुए दिव्य प्रेरणा प्रदान की। मुख्य वक्ता के रूप में श्री रामाशीष सिंह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य “चिति – प्रज्ञा प्रवाह” ने भारत के महान पराक्रमी विक्रमादित्य के उद्बोधन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विक्रम संवत्सर न केवल भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का एक अनिवार्य अंग है, बल्कि यह राष्ट्र की पहचान, गौरवशाली इतिहास एवं आत्मनिर्भरता की भावना को भी उजागर करता है।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी नव वर्ष की मंगलकामनाओं के संदर्भ में अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा, “नव वर्ष का आगमन हमें नवीन ऊर्जा और उत्साह से भर देता है। जैसे प्रकृति अपने पुराने पत्तों को त्यागकर नए फूलों से सज जाती है, वैसे ही हमें भी हर दिन अपने मन को नवीनता, उमंग और सद्भावना से सजाना चाहिए। इस नव वर्ष में मैं समस्त राष्ट्र को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।”
इस आयोजन में वैदिक सूत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भी स्मरण कराया गया, जिससे यह संदेश मिलता है कि सम्पूर्ण मानव समाज की कल्याण एवं समृद्धि के लिए एकजुट होकर प्रयास करना आवश्यक है। हिंदू नव वर्ष महोत्सव न केवल नूतन वर्षारम्भ का प्रतीक है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण, नवीनीकरण एवं आंतरिक विकास का भी प्रतीक है, जो हमें प्रतिदिन अपने भीतर नये पत्ते, नये फूल सजाने की प्रेरणा देता है।
इस प्रकार, कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान एवं राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया है, जो उपस्थित अतिथियों एवं सहभागी जनसमूह के बीच भारतीय कालगणना एवं पञ्चाङ्ग की महत्ता तथा विक्रम संवत्सर के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है।