संस्कृत नाट्य प्रस्तुति ‘आश्वासनम्’ का भावपूर्ण मंचन: संघर्ष और स्वावलंबन का संदेश

संस्कृत संस्थान एवं भारतोदय के संयुक्त तत्वाधान में लखनऊ में हुआ भव्य आयोजन

योग्यता और आत्मनिर्भरता के संदेश के साथ नाटक ने दर्शकों को किया प्रेरित

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। नेताजी सुभाषचंद्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 27 मार्च 2025 को संस्कृत नाट्य प्रस्तुति आश्वासनम् का सफल मंचन किया गया। यह नाटक संस्कृत संस्थान एवं भारतोदय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एकमासात्मक प्रस्तुतिपरक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रस्तुत किया गया। इस प्रभावशाली नाटक की रचना डॉ. ओम प्रकाश त्रिपाठी ने की, जबकि निर्देशन चंद्रभाष सिंह एवं सह-निर्देशन डॉ. आनंद दीक्षित ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. पवन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन अजय कुमार त्रिवेदी, एन.एस.सी.बी. कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रश्मि विश्नोई, राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. उमा सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।

संघर्ष, आशा और आत्मनिर्भरता का संदेश

आश्वासनम् नाटक समाज के उन युवाओं की त्रासदी को प्रस्तुत करता है, जो प्रतिभाशाली होते हुए भी रोजगार की खोज में निराशा का सामना करते हैं। नाटक का नायक शिव एक उत्साही और कर्मठ युवक है, जो समाज, परिवार, साहित्य, दर्शन और धर्म के लिए कुछ करने का संकल्प रखता है। वह अपने प्रयासों से जीवन को संवारना चाहता है, लेकिन लगातार संघर्ष के बावजूद हर जगह उसे अस्वीकार ही मिलता है।

कहानी में शिव की मित्र प्रतिभा उसे सहयोग और प्रणय का प्रस्ताव देती है, किंतु आत्मसम्मान से परिपूर्ण शिव किसी और को अपने संघर्ष में शामिल नहीं करना चाहता। जब उसका मित्र सुबोध उसे एक प्रसिद्ध नेता से मिलवाता है, तो उसे आशा की एक किरण दिखाई देती है। परंतु वर्षों तक नेता के द्वार पर चक्कर लगाने के बाद भी उसे केवल खोखले आश्वासन ही मिलते हैं।

जब सरकारी नौकरी प्राप्त करने की उसकी अंतिम सीमा समाप्त हो जाती है, तो शिव निराश होकर विषपान करने का प्रयास करता है। किंतु उसके मित्र उसे बचाने का हरसंभव प्रयास करते हैं। अंततः कहानी एक प्रेरणादायक मोड़ लेती है, जब नेता के नौकर को भी अपने स्वामी की राजनीति से घृणा हो जाती है और वह उसका तिरस्कार कर देता है। सूत्रधार स्वावलंबन को ही सफलता का मार्ग घोषित करता है और नाटक का समापन आत्मनिर्भरता के प्रेरक संदेश के साथ होता है।

नाट्य मंचन ने दर्शकों को किया प्रभावित

इस प्रभावशाली नाट्य मंचन में गोविंद कुमार, के. के. पांडेय, प्रेणा, आर्यन कुमार, विदुषी तिवारी, निहारिका कश्यप, अविनाश कुमार पांडेय, रूपेश मेहता, समर्थ अग्रवाल, आँचल सचदेवा, कोमल प्रजापति, जूही कुमारी, सृष्टि प्रताप, शिवम मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, आशीष पांडेय, हरिओम और अलभ्य तिवारी ने उत्कृष्ट अभिनय किया।

संस्कृत भाषा में मंचित इस नाटक ने दर्शकों को गहरे तक प्रभावित किया और युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह अपनाने के लिए प्रेरित किया। आश्वासनम् ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सफलता केवल आश्वासनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि आत्मनिर्भरता और कर्मठता से ही प्राप्त की जा सकती है।

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