गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक प्रभाव से विवाह में आने वाली बाधाओं का समाधान

वैदिक अनुष्ठान और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विवाह संस्कार की शुद्धि

हरेन्द्र सिंह दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।सनातन धर्म में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और उनकी ऊर्जा का एक पवित्र संगम होता है। किंतु वर्तमान समय में कुंडली मिलान, मांगलिक दोष और अन्य ज्योतिषीय विचारधाराओं के कारण कई विवाह रुक जाते हैं। कुछ मामलों में, वर-वधू एक-दूसरे को पसंद कर लेते हैं, लेकिन कुंडली न मिलने के कारण परिवार विवाह से इनकार कर देता है। वहीं, कभी-कभी कुंडली तो अनुकूल होती है, परंतु वैवाहिक जीवन में समरसता नहीं बन पाती।

गायत्री मंत्र: आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत

महर्षि विश्वामित्र द्वारा प्रदत्त गायत्री मंत्र को सनातन धर्म में अद्वितीय स्थान प्राप्त है। यह मंत्र न केवल आत्मिक बल प्रदान करता है, बल्कि ग्रहदोष निवारण में भी सहायक माना जाता है। गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने ग्रंथ गायत्री महाविज्ञान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष अनुष्ठानों का पालन किया जाना चाहिए।

विवाह पूर्व गायत्री अनुष्ठान का महत्व

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार, यदि विवाह से पूर्व 24 लाख गायत्री मंत्रों का जप, हवन, यज्ञ और ब्राह्मण भोजन कराया जाए, तो वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती। यह प्रक्रिया केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का साधन है। यह न केवल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, बल्कि नव दंपति के जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक समरसता लाता है।

वैदिक दृष्टिकोण से विवाह अनुष्ठान

ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में विवाह संस्कार को पवित्रतम यज्ञ बताया गया है। विशेष रूप से अथर्ववेद में विवाह के मंगल श्लोक इस प्रकार वर्णित हैं—

“समानो मन्त्रः समितिः समानी, समानं मनः सहचित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः, समानेन वो हविषा जुहोमि॥”
(अथर्ववेद 6.64.3)

इस मंत्र का अर्थ है कि पति-पत्नी का मन, विचार, संकल्प और भावना समान होनी चाहिए। जब दोनों आध्यात्मिक रूप से समरस होते हैं, तभी गृहस्थ जीवन सफल होता है।

मांगलिक दोष और वैदिक समाधान

मांगलिक दोष को लेकर अनेक भ्रांतियां समाज में फैली हुई हैं। कई बार इसे अत्यधिक भयभीत करने वाला बना दिया जाता है, जबकि वेदों में इसे नकारात्मक रूप से नहीं देखा गया है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यदि व्यक्ति नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करता है और विवाह से पूर्व हवन-यज्ञ करता है, तो मांगलिक दोष स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

गायत्री मंत्र का प्रभावशाली वैदिक श्लोक

गायत्री मंत्र स्वयं में एक शक्तिशाली वेद मंत्र है—

“ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥”

इस मंत्र का अर्थ है कि हम उस परम दिव्य प्रकाशमान सविता देव की उपासना करते हैं, जो हमें सत्य की ओर प्रेरित करें और हमारे बुद्धि को श्रेष्ठ बनाए।

आत्मबोधन

विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का मिलन है। कुंडली मिलान और ज्योतिषीय विचारधाराओं को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों के बीच गायत्री मंत्र और वैदिक अनुष्ठान समाधान के रूप में सामने आते हैं। यदि विवाह पूर्व उचित मंत्र जाप, यज्ञ, हवन और संकल्पित उपासना की जाए, तो वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं को सरलता से दूर किया जा सकता है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित गायत्री महाविज्ञान इस संदर्भ में न केवल आध्यात्मिक, बल्कि वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे समाज में सकारात्मकता और धार्मिक समरसता का संचार होता है।

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