
दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ /प्रयागराज। प्रयागराज में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की संस्कृतभारती द्वारा आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण, वैचारिक दृष्टि से प्रखर एवं दिशाबोधक गौष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया। इस बौद्धिक समवेत का प्रधान उद्देश्य संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं सार्वजनीन प्रसार हेतु दीर्घकालिक, सुनियोजित तथा क्रियान्वयनयोग्य कार्यनीति का निर्माण करना रहा। इस अवसर पर उपस्थित विद्वत्समाज एवं संगठन के दायित्वधारियों ने इस विषय पर गंभीर चिंतन किया कि संस्कृत को किस प्रकार पुनः लोकजीवन की प्राणभूत भाषा के रूप में प्रतिष्ठापित किया जाए।

गोष्ठी के दौरान यह सर्वसम्मत मत प्रकट हुआ कि संस्कृत को केवल शास्त्रीय ग्रंथों, अकादमिक परिसरों अथवा औपचारिक अध्ययन तक सीमित रखना इसके गौरवशाली परंपरागत स्वरूप के साथ अन्याय होगा। आवश्यकता इस बात की है कि संस्कृत को व्यवहारिक जीवन, सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों तथा आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी माध्यमों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जनमानस से जोड़ा जाए। संस्कृत शिक्षण की सहज, संवादप्रधान एवं आकर्षक पद्धतियों, बालक-युवा केंद्रित संस्कारात्मक अभियानों, संस्कृत संभाषण शिविरों तथा ग्राम-नगर स्तर पर संस्कृत संस्कार केंद्रों की स्थापना एवं विस्तार जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

इस अवसर पर अखिल भारतीय संगठन मंत्री संस्कृतभारती श्री जयप्रकाश गौतम के कुशल, दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित इस वैचारिक गोष्ठी में श्री प्रमोद पंडित (क्षेत्रीय संगठन मंत्री), श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह (क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख, पूर्व उत्तर प्रदेश), श्री चन्द्र भूषण त्रिपाठी (अध्यक्ष, अवध प्रांत), श्री रत्नेश त्रिपाठी (मंत्री, कर्णपुर प्रांत), श्री राम नारायण द्विवेदी (अध्यक्ष), श्री नागेश पाण्डेय (मंत्री) तथा श्री सालिगराम त्रिपाठी (सहमंत्री, काशी प्रांत) की उल्लेखनीय, सार्थक एवं सक्रिय सहभागिता रही। सभी दायित्वधारियों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की आगामी कार्ययोजनाओं, संगठनात्मक पुनर्संरचना, कार्यकर्ता-प्रशिक्षण, जनसंपर्क सुदृढ़ीकरण तथा संस्कृत को जनांदोलन का स्वरूप प्रदान करने संबंधी विषयों पर विस्तार से परिचर्चा एवं गहन विमर्श किया।
औपचारिक रूप से यह गौष्ठी प्रयागराज में अत्यंत अनुशासित, सौहार्दपूर्ण एवं वैचारिक वातावरण में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता अखिल भारतीय संगठन मंत्री संस्कृतभारती श्री जयप्रकाश गौतम ने की। बैठक के अंत में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक एकात्मता को और अधिक दृढ़ करने, संस्कृतभारती के उद्देश्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने तथा संस्कृत के पुनर्जागरण को राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग बनाने हेतु सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

