
दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।लखनऊ के गोमती नगर फेस–2 स्थित विकल्प बस्ती में आज हिंदू चेतना, राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता का विराट दृश्य उस समय साकार हुआ, जब विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में समाज के सैकड़ों जागरूक नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदू समाज अब विचार, संगठन और राष्ट्रबोध के पथ पर दृढ़ संकल्प के साथ अग्रसर है। वातावरण राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और आत्मीय एकजुटता से ओतप्रोत दिखाई दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी डी.के. अग्रवाल ने की, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने सम्मेलन को अनुशासन और संतुलन प्रदान किया। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अशोक सिन्हा ने अपने प्रखर एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन से श्रोताओं को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथियों के रूप में मातृशक्ति से यशोदरा बहन, संत समाज से संपूर्णानंद महाराज तथा प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. एस.एन. सिंह की उपस्थिति ने सम्मेलन को वैचारिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
अपने उद्बोधन में मुख्य वक्ता अशोक सिन्हा ने कहा कि भारत स्वभाव से ही एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर राष्ट्र रहा है, किंतु वर्तमान समय में कुछ दुर्जन शक्तियाँ देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने का दुस्साहस कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग भारत माता की अखंडता और राष्ट्रवाद में आस्था रखते हैं, वही सज्जन शक्ति हैं और वही राष्ट्र को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं। राष्ट्र को तोड़ने की मानसिकता रखने वाली शक्तियाँ भारत की आत्मा को कभी पराजित नहीं कर सकतीं।
अशोक सिन्हा ने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान समय में पूरे देश में लगभग 43 हजार हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें से अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 4 हजार सम्मेलन संपन्न हो रहे हैं। यह आँकड़ा स्वयं में हिंदू समाज की जागरूकता और संगठित चेतना का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वास्तविक अर्थों में विश्व गुरु बनाना है, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन के विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना और उन्हें जीवन व्यवहार में उतारना अनिवार्य है।
हिंदू सम्मेलन के समन्वयक एवं भाजपा नेता प्रदीप मिश्रा ने बताया कि गोमती नगर फेस–2 क्षेत्र में विकल्प बस्ती के साथ-साथ विनम्र बस्ती, वास्तु बस्ती एवं विभव बस्ती में भी समानांतर रूप से हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। चारों स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे, जो इस बात का संकेत है कि हिंदू समाज अब बस्तियों, मोहल्लों और परिवारों के स्तर पर संगठित होने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी 31 जनवरी को विशेष बस्ती एवं विक्रांत बस्ती में भी हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं।
विकल्प बस्ती में आयोजित सम्मेलन के संयोजक श्री नारायण रहे, जिनके कुशल संचालन में कार्यक्रम अनुशासित एवं प्रभावी रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर संघ चालक जगवीर सिंह, नगर कार्यवाह चेतन डुंगरकोटी, सह नगर कार्यवाह रजनीश कुमार, नगर सामाजिक सद्भाव प्रमुख मनीष पाण्डेय, नगर संपर्क प्रमुख चंद्रशेखर पाण्डेय, नगर व्यवस्था प्रमुख सुधीर सहगल, नगर प्रचारक अविनाश सहित विषम्भर पाण्डेय, अंबुज तिवारी, योगेश कुमार मौर्य, राकेश परिहार, स्कंद पांडेय, संजीव पांडेय, नलनी कांत सिंह, राजेश रावत, उमेश मोदी, प्रमोद शुक्ला सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विनम्र बस्ती में आयोजित सम्मेलन के संयोजक अतुल द्विवेदी, हेमलता सिंह एवं शिव शंकर मिश्र (गायत्री शक्तिपीठ) रहे। यहाँ मुख्य वक्ता के रूप में पंकज पटवा, विभाग सह कार्यवाह (आरएसएस, लखनऊ विभाग) उपस्थित रहे। इस अवसर पर राम अवध चौहान, प्रखर निगम, डुंगर सिंह अलमिया, ओम प्रकाश गुप्ता, धर्मेंद्र सोनी सहित अनेक समाजसेवियों ने सहभागिता निभाई।
वास्तु बस्ती में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व महापौर लखनऊ श्रीमती संयुक्ता भाटिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. संजय भट्ट (सर्जन, डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान), प्रभुनाथ राय, नीरा वर्षा सिन्हा, प्रमोद सिंह, राम चंद्र शुक्ला, नितेश मिश्रा, पी.एन. सिंह, शिवेश द्विवेदी सहित सैकड़ों की संख्या में समाज के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
विभव बस्ती में आयोजित सम्मेलन में भी समाज की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राजेंद्र चौबे, रतन दीप, नरेंद्र गुप्ता, सरबजीत सिंह, राकेश पाण्डेय, राम बदन दुबे, दिनेश द्विवेदी सहित सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
इन सम्मेलनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदू समाज अब बिखराव से ऊपर उठकर संगठन, संस्कार और समर्पण के पथ पर आगे बढ़ रहा है। यह विराट चेतना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नवभारत के निर्माण की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक और ऐतिहासिक कदम है।
