

दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ।नफ़ासत, नज़ाकत और तहज़ीब की अनुपम त्रयी से अलंकृत अवध-नगरी लखनऊ एक बार पुनः अपने सांस्कृतिक वैभव और प्रकृति-प्रेम के अद्वितीय समन्वय का साक्षी बनने जा रही है। बाग़ों और पुष्पों की सुरभि से अभिसिंचित यह नगर, जो लोकविश्वास में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के संस्कारों से अनुप्राणित माना जाता है, अब राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी हरित चेतना की नवीन आभा बिखेरने को तत्पर है। 21 फरवरी 2026 को आमजन के स्वागतार्थ सुसज्जित और सुव्यवस्थित पुष्प प्रदर्शनी केवल एक आयोजन नहीं, अपितु सनातन संस्कृति की सजीव अभिव्यक्ति बनकर अवतरित हो रही है।

यह प्रदर्शनी मात्र रंग-बिरंगे पुष्पों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का सामूहिक उद्घोष है। प्रत्येक कली में सृजन का संदेश है, प्रत्येक पंखुड़ी में पर्यावरणीय संतुलन का मर्म निहित है। नगर निगम द्वारा सुविचारित रूप से विन्यस्त यह आयोजन जन-जन में प्राकृतिक सौंदर्य-बोध को जागृत करने का सशक्त माध्यम सिद्ध हो रहा है। जिस परंपरा का बीजारोपण पद्मश्री एस. सी. राय ने दूरदर्शी पर्यावरणीय दृष्टि से किया था, उसे वर्तमान महापौर सुषमा खर्कवाल ने नवीन ऊर्जा, संगठनात्मक दक्षता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता के साथ विस्तार प्रदान किया है। उनके नेतृत्व में यह पुष्पोत्सव नगर की अस्मिता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का प्रतीक बन उठा है।

विशेष उल्लेखनीय है कि जिस शिवरी कूड़ा स्थल को कभी अपार अपशिष्ट के पर्वत के रूप में जाना जाता था, वही स्थान आज पर्यावरणीय पुनरुत्थान का उदाहरण बन रहा है। जैव-खनन की वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से उस विशाल कूड़ा-ढेर का क्रमशः निष्पादन कर उसे स्वच्छता और हरित विकास की दिशा में परिवर्तित किया जा रहा है। यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, मानसिक भी है—क्योंकि जहाँ कभी दुर्गंध और उपेक्षा थी, वहीं अब स्वच्छता, सौंदर्य और संवेदना का संदेश प्रतिध्वनित हो रहा है।

इसी पुनर्जागरण की कड़ी में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता जनचेतना को जाग्रत करने की विशिष्ट पहल है। यह आयोजन नागरिकों, विशेषकर नवपीढ़ी को यह संदेश देता है कि प्रकृति केवल उपभोग की वस्तु नहीं, संरक्षण की सामूहिक साधना है। जब बच्चे अपने कोमल हाथों से प्रकृति का चित्र अंकित करते हैं और जब परिवार पुष्पों की छटा में जीवन की लय अनुभव करते हैं, तब नगर का प्रत्येक कोना पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की अनुभूति से आलोकित हो उठता है।
लखनऊ नगर निगम और महापौर सुषमा खर्कवाल की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि विकास और प्रकृति-वंदना परस्पर विरोधी नहीं, अपितु पूरक हैं। यह पुष्पोत्सव केवल दृश्य आनंद का उत्सव नहीं, बल्कि हरित चेतना का आह्वान है—एक ऐसा आह्वान, जो प्रत्येक नागरिक को यह स्मरण कराता है कि यदि हम प्रकृति को सहेजेंगे, तो प्रकृति हमें जीवन, सौंदर्य और संतुलन का अमूल्य उपहार देती रहेगी। इस सुरभित आयोजन के माध्यम से लखनऊ पुनः सिद्ध कर रहा है कि उसकी तहज़ीब केवल व्यवहार में नहीं, बल्कि प्रकृति-प्रेम में भी सुवासित है।
