
दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ/मेरठ। राष्ट्र जीवन में विरल ही ऐसे क्षण आते हैं, जब किसी निर्णय के माध्यम से इतिहास स्वयं को सम्मानित अनुभव करता है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया जाना केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि भारतीय कृषक चेतना के गौरव का पुनर्स्मरण है। यह निर्णय उन असंख्य अन्नदाताओं के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की सामूहिक वंदना है, जिनकी साधना और संघर्ष ने भारत की आत्मा को पोषित किया है।
राष्ट्रीय लोकदल व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित अग्रवाल ने कहा कि मेरठ की पुण्यभूमि से प्रधानमंत्री द्वारा चौधरी चरण सिंह का स्मरण करते हुए व्यक्त विचारों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, अपितु संपूर्ण प्रदेश में आत्मसम्मान और आश्वस्ति का वातावरण निर्मित किया है। उन्होंने इसे किसान अस्मिता के पुनर्प्रतिष्ठान का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि जब राष्ट्र अपने कृषक-नायक का गौरवगान करता है, तब लोकतंत्र की जड़ें और अधिक सुदृढ़ होती हैं।
रोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि ‘भारत रत्न’ प्रदान करने का निर्णय इस तथ्य का प्रमाण है कि वर्तमान शासन व्यवस्था किसान नेतृत्व के योगदान को न केवल स्वीकार करती है, बल्कि उसे राष्ट्रीय स्मृति में प्रतिष्ठित भी करती है। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन किसानों के अधिकार, स्वाभिमान और आर्थिक स्वावलंबन के लिए समर्पित रहा। ऐसे व्यक्तित्व को सर्वोच्च सम्मान से विभूषित करना वस्तुतः कृषि संस्कृति के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता की उद्घोषणा है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय तक विभिन्न राजनीतिक दलों—विशेषकर कांग्रेस—की सरकारें रहीं, किंतु किसी ने भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं की। यह वर्तमान नेतृत्व की दूरदृष्टि और संवेदनशीलता है, जिसने यह अनुभव किया कि कृषक हितों के लिए आजीवन संघर्षरत रहे जननायक को राष्ट्र की सर्वोच्च उपाधि से अलंकृत किया जाना चाहिए। यह निर्णय केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि ऐतिहासिक उपेक्षा की परिपूर्ति भी है।
मेरठ, जिसे चौधरी चरण सिंह की जन्मभूमि और कर्मभूमि के रूप में आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है, वहीं से उन्हें नमन करना किसानों के आत्मगौरव से सीधे जुड़ा हुआ संदेश है। यह प्रतीकात्मकता बताती है कि राष्ट्र अपने उन पुरोधाओं को विस्मृत नहीं करता, जिन्होंने ग्राम्य जीवन, कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण सशक्तिकरण को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।
रोहित अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु बहुआयामी प्रयास कर रही है। चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, एथेनॉल इकाइयों की स्थापना, भंडारण क्षमता के विस्तार तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की योजनाएँ किसानों की आय वृद्धि के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। डिजिटल मंडियों और ई-नाम व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शी मूल्य सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जिससे कृषक को उसकी उपज का न्यायसंगत प्रतिफल प्राप्त हो सके।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृषि रक्षा इकाइयों तथा डिजिटल माध्यमों के द्वारा तकनीकी जानकारी और नवाचार किसानों तक पहुँचाए जा रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन संभव हो सका है। यह समग्र दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि किसान केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की केंद्रीय शक्ति है।
अंत में रोहित अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि चौधरी चरण सिंह को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने से किसानों में नवीन उत्साह का संचार होगा, राष्ट्रीय लोकदल का जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और अधिक सुदृढ़ होगा तथा राजनीतिक गठबंधन को भी नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसान सम्मान और समर्पण की भावना को दृढ़ करता है तथा भविष्य में भी शासन किसानों के हितों की रक्षा हेतु निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा।
निस्संदेह, यह सम्मान केवल एक व्यक्तित्व का अलंकरण नहीं, बल्कि भारतीय कृषि संस्कृति की अस्मिता का अभिनंदन है—एक ऐसा अभिनंदन, जो इतिहास के पृष्ठों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।
