
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से की शिष्टाचार भेंट, राष्ट्रसुरक्षा एवं विकास पर हुआ सारगर्भित संवाद
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान भारत के माननीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार शिष्टाचार भेंट कर होलिकोत्सव की अग्रिम मंगलकामनाएँ अर्पित कीं। यह भेंट औपचारिकता से परे राष्ट्रहित, सुरक्षा-संकल्प और सांस्कृतिक जागरण की गंभीर भूमिका में परिवर्तित हो गई, जहाँ भारत की सामरिक सुदृढ़ता और सामाजिक समन्वय के विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श हुआ।
भेंट उपरांत मीडिया से संवाद करते हुए जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज भारत की सीमाएँ जिस आत्मविश्वास, दृढ़ता और तकनीकी सामर्थ्य के साथ सुरक्षित हैं, वह माननीय रक्षामंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतिफल है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “राष्ट्र की सुरक्षा केवल शस्त्रों से नहीं, बल्कि संकल्प, नीति-निष्ठा और निर्णायक नेतृत्व से सुनिश्चित होती है—और यह तीनों गुण माननीय राजनाथ सिंह के व्यक्तित्व में अद्वितीय समन्वय के साथ विद्यमान हैं।”
उन्होंने रक्षामंत्री द्वारा सेनाओं के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन तथा सैनिकों के मनोबल को उच्चतम स्तर पर बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान कालखंड में भारत ने जिस प्रकार आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की ओर तीव्र गति से अग्रसर होकर वैश्विक मंच पर अपनी सामरिक प्रतिष्ठा सुदृढ़ की है, वह राष्ट्रीय गौरव का विषय है। यह नेतृत्व राष्ट्र को न केवल सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उसे आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भी बना रहा है।
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि माननीय रक्षामंत्री की दृष्टि केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, अपितु वे अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। लखनऊ को विश्वस्तरीय नगरीय संरचना, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं, सुदृढ़ परिवहन तंत्र तथा सुव्यवस्थित सामाजिक व्यवस्थाओं से सुसज्जित करने की उनकी निरंतर सक्रियता प्रशंसनीय ही नहीं, प्रेरणादायी भी है।
कानपुर ग्रीन कॉरिडोर सहित विभिन्न अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने के उनके प्रयासों को उल्लेखित करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल विकास योजनाएँ नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए समृद्धि का आधार-निर्माण है। ऐसी प्रतिबद्धता ही जनविश्वास को सुदृढ़ करती है और नेतृत्व को जनमानस के हृदय में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ की ओर से उन्होंने यह भी कहा कि संगठन राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक समरसता के संरक्षण हेतु सतत सक्रिय है। “हमारा संगठन मानता है कि सशक्त राष्ट्र, जागृत समाज और उत्तरदायी नेतृत्व—ये तीनों मिलकर ही भारत को विश्वगुरु पद की ओर अग्रसर कर सकते हैं,” उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा।
समापन में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने रक्षामंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि देश ऐसे नेतृत्व के प्रति स्वयं को सौभाग्यशाली अनुभव करता है। यह शिष्टाचार भेंट वस्तुतः राष्ट्रनिष्ठ विचारों का आदान-प्रदान थी, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो और समाज सजग, तब भारत की प्रगति अविराम और अजेय होती है।
