अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री का ऐतिहासिक संकल्प: नारी शक्ति को सम्मान, रोजगार और स्वावलम्बन की नई उड़ान

नवनियुक्त मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र, मेधावी बालिकाओं व उत्कृष्ट महिला कार्मिकों को सम्मान


‘रोजगार महाकुम्भ-2026 (पिंक एडिशन)’ और ‘रोजगार संगम पोर्टल’ मोबाइल ऐप का शुभारम्भ


आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 38.49 करोड़ रुपये डीबीटी से हस्तांतरित, बेटियों के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ की घोषणा


दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 8 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान उस समय उत्साह, गौरव और आशा के असाधारण वातावरण से भर उठा, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने नारी सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले अनेक ऐतिहासिक निर्णयों की घोषणा की। समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह उस बदलते उत्तर प्रदेश का प्रतीक बन गया, जहाँ नारी शक्ति को सम्मान, सुरक्षा और स्वावलम्बन की दिशा में निरंतर सशक्त किया जा रहा है। मंच से उठी हर घोषणा ने उपस्थित जनसमूह में उत्साह और उम्मीद की नई लहर पैदा कर दी।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए, उत्कृष्ट महिला कार्मिकों, बाल विवाह की रोकथाम में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं तथा राजकीय बालिका गृहों की मेधावी बालिकाओं को सम्मानित किया और उन्हें ‘नारी शक्ति अवॉर्ड’ से अलंकृत किया। जैसे ही मंच से इन प्रतिभाशाली बेटियों और कर्मनिष्ठ महिलाओं के नाम पुकारे गए, सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। यह दृश्य केवल सम्मान का नहीं, बल्कि उस बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का प्रतीक था, जहाँ नारी के श्रम, साहस और प्रतिभा को गर्व के साथ स्वीकार किया जा रहा है।


इसी उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच मुख्यमंत्री ने ‘रोजगार महाकुम्भ-2026 (पिंक एडिशन)’ का शुभारम्भ करते हुए ‘रोजगार संगम पोर्टल’ मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया। यह पहल प्रदेश की लाखों युवतियों और महिलाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अवसर और आत्मविश्वास एक साथ मिलते हैं, तब परिवर्तन की धारा स्वयं मार्ग प्रशस्त करती है।


समारोह का एक अत्यंत भावनात्मक क्षण वह था, जब मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की लाभार्थी बालिकाओं को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किए। उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 25 हजार रुपये का आर्थिक पैकेज प्रदान कर रही है, जिससे अब तक 27 लाख से अधिक बेटियां लाभान्वित हो चुकी हैं। यह घोषणा सुनते ही सभागार में बैठे अभिभावकों के चेहरे पर संतोष और गर्व की झलक स्पष्ट दिखाई दी।


मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बीमा प्रीमियम तथा साड़ी/वर्दी के लिए 38 करोड़ 49 लाख रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की। साथ ही उन्हें 05 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा के लिए कार्ड भी प्रदान किए गए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार शीघ्र ही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने जा रही है, जिससे उनका योगदान और अधिक सम्मानजनक रूप से मान्यता प्राप्त कर सकेगा।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से Varanasi, Chandauli, Ghazipur और Jaunpur जनपदों की महिला लाभार्थियों से संवाद किया। इस संवाद के दौरान महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं—किसी ने फूलों की खेती से आत्मनिर्भरता प्राप्त की, तो किसी ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उद्यमिता की नई राह बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रदेश की बेटियां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती हैं, तो पूरा समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाता है।


मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक ऐतिहासिक पहलें हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट मत है कि आधी आबादी को सशक्त किए बिना कोई भी समाज आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘मातृ वंदना’ जैसी योजनाओं ने देश और प्रदेश की बेटियों को आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के ‘5-टी विजन’—ट्रेडिशन, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन—को आधार बनाकर कार्य कर रही है। जब परंपरा का सम्मान, तकनीक का उपयोग, पारदर्शिता का पालन और जनता का विश्वास एक साथ जुड़ते हैं, तब विकास का वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि उत्तर प्रदेश आज इस ‘5-टी मॉडल’ का सशक्त उदाहरण बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रदेश सरकार शीघ्र ही बेटियों के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ प्रारम्भ करने जा रही है। प्रारंभिक चरण में स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जाएगी, जिससे वे शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक आसानी से पहुँच सकें। यह घोषणा सुनते ही सभागार में उपस्थित छात्राओं के चेहरों पर उत्साह और उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में लगभग 36 से 37 प्रतिशत महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश पुलिस में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से महिला कार्मिकों की संख्या बढ़कर 44 हजार से अधिक हो चुकी है, जो महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में युवा, महिला, किसान और गरीब को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं की व्यवस्था की है। न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल इंट्रप्रेन्योर की स्थापना, महिला उद्यमियों के लिए विपणन योजनाएँ तथा Lucknow और Prayagraj में मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों की स्थापना जैसी पहलों से महिलाओं को नए आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे।


कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नारी सुरक्षित है, तो समाज सुरक्षित है; यदि नारी सम्मानित है, तो राष्ट्र सम्मानित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की बेटियाँ शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराएँगी और आने वाले समय में संसद तथा विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के साथ देश के भविष्य को दिशा देंगी।


इस भव्य समारोह में महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान, उपाध्यक्ष चारु चौधरी व अपर्णा यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित यह समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा—यह उस नए उत्तर प्रदेश की झलक बन गया, जहाँ नारी शक्ति केवल सम्मानित ही नहीं, बल्कि विकास और परिवर्तन की अग्रदूत बनकर उभर रही है।

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