“अनलिमिटेड पोटेंशियल से विकसित उत्तर प्रदेश तक—क्रेडिट, सहकारिता और कृषि के सहारे आर्थिक महाशक्ति बनने की निर्णायक यात्रा”


दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश एक अनलिमिटेड पोटेंशियल वाला प्रदेश है, किंतु यह क्षमता तभी पूर्णतः साकार होगी जब विकसित भारत के लक्ष्य के साथ विकसित उत्तर प्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की परिकल्पना जमीन पर उतरे।

उन्होंने कहा कि कार्यक्षमता, दक्षता और ईमानदार नीयत के समन्वय से ही यह असीम संभावनाओं वाला प्रदेश राष्ट्रीय विकास की धुरी बन सकता है। राज्य ऋण संगोष्ठी जैसे विमर्शात्मक मंच इस लक्ष्य की प्राप्ति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, क्योंकि यहीं से नीति, पूंजी और क्रियान्वयन की दिशा तय होती है।


मुख्यमंत्री राज्य के प्राथमिक क्षेत्रों में ऋण संभाव्यता पर आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी 2026–27 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नाबार्ड द्वारा तैयार स्टेट फोकस पेपर 2026–27 का विमोचन किया तथा ई-केसीसी पोर्टल का लोकार्पण कर डिजिटल गवर्नेंस को नई गति दी। साथ ही एफपीओ, जिला सहकारी बैंक, महिला स्वयं सहायता समूह, पैक्स कम्प्यूटरीकरण तथा व्यावसायिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्रदूतों को सम्मानित कर यह संदेश दिया कि सरकार परिश्रम, नवाचार और परिणाम देने वालों के साथ खड़ी है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संगोष्ठी में प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों और सहकारिता आंदोलन को धरातल पर उतारने वाले पैक्स की सक्सेस स्टोरी प्रस्तुत की जा रही हैं, ताकि अन्य लोग इनसे प्रेरणा लेकर अपने प्रयासों को नई ऊंचाई दे सकें। उन्होंने इसे ज्ञान के प्रसार और आत्मनिर्भरता की श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल बताया।


दिव्यांगजन की सहभागिता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कुशीनगर स्थित दिव्यांगजन संचालित कसया मिल्क प्रोड्यूसर का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें 1005 सदस्य सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि यह इकाई बुंदेलखंड की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर की तर्ज पर कार्य करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर को सुदृढ़ कर रही है। यह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी आंखें खोलने वाला उदाहरण है कि अवसर मिलने पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित कर सकते हैं।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने मथुरा स्थित 750 महिला सदस्यों वाली माँट मस्टर्ड उत्पादक कंपनी का उल्लेख किया, जो सरसों तेल के प्रोसेसिंग से उल्लेखनीय मुनाफा अर्जित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि अन्नदाता किसान, हस्तशिल्पी, कारीगर और सहकारिता से जुड़े लोग थोड़े से प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ें, तो इसके दूरगामी और बहुआयामी परिणाम सामने आते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और आजादी के बाद पहली बार सहकारिता मंत्रालय का गठन इस क्षेत्र की महत्ता को दर्शाता है। एफपीओ और महिला स्वयं सहायता समूहों को हर स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से लखपति दीदी योजना के तहत ग्रामीण उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए शी-मार्ट की व्यवस्था यूनियन बजट में की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।
वर्ष 2017 से पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय प्रदेश विकास और रोजगार के मोर्चे पर ठहरा हुआ था, सहकारी क्षेत्र माफियाओं के शिकंजे में था और रिजर्व बैंक द्वारा 16 जिला सहकारी बैंकों को डिफॉल्टर घोषित किया गया था। आज स्थिति यह है कि इन 16 में से 15 बैंक लाभ में हैं और शेष को भी शीघ्र लाभ की स्थिति में लाया जा रहा है। टर्नओवर और क्रेडिट सीमा में वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि सहकारिता फिर से एक सशक्त आंदोलन के रूप में उभर चुकी है।


मुख्यमंत्री ने ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना को सरकार की दूरदर्शी नीति बताते हुए कहा कि इसी के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश एमएसएमई क्षेत्र में 5 लाख रुपये का सुरक्षा बीमा देने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयाँ कार्यरत हैं, जिन पर लगभग 3 करोड़ परिवारों की आजीविका निर्भर है। स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग, तकनीक, मार्केटिंग और डिजाइनिंग से जोड़कर वैश्विक पहचान दिलाई गई है।


उन्होंने बताया कि प्रदेश का निर्यात 84 हजार करोड़ से बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ आज राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बन चुका है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के एफपीओ द्वारा किए गए कार्यों की वैश्विक सराहना इसका प्रमाण है।


मुख्यमंत्री ने आर्थिक संकेतकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश का क्रेडिट-डेबिट रेशियो 43 प्रतिशत से बढ़कर 61 प्रतिशत हो चुका है और इसे 2026–27 में 65 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। एस्पिरेशनल जिलों में भी यह अनुपात उल्लेखनीय रूप से सुधरा है। उन्होंने बैंकर्स से अपील की कि वे शर्तों को सरल बनाएं, ब्याज दरें कम करें और एफपीओ को प्रशिक्षण देकर बैंकिंग व्यवस्था से सशक्त रूप से जोड़ें।
कृषि क्षेत्र पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 86 प्रतिशत सिंचित भूमि है, जिससे कृषि लागत स्वाभाविक रूप से कम होती है। मुफ्त बिजली, निःशुल्क नहर सिंचाई, सोलर पैनल और डीबीटी के माध्यम से एमएसपी भुगतान किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। डीएसआर पद्धति, नेचुरल फार्मिंग और एग्रीटेक जैसे नवाचार किसानों के मुनाफे को कई गुना बढ़ा रहे हैं।


उन्होंने बताया कि प्रदेश आज एथेनॉल और चीनी उत्पादन में देश में अग्रणी है। ई-केसीसी पोर्टल से किसानों को मात्र पांच मिनट में ऋण सुविधा मिलना डिजिटल गवर्नेंस की ऐतिहासिक उपलब्धि है। एआई आधारित कृषि प्लेटफॉर्म, सहकारिता का डिजिटलीकरण और विश्व बैंक के सहयोग से एग्रीटेक परियोजनाएं भविष्य की दिशा तय कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि यदि कृषि, एमएसएमई, एग्रीटेक, महिला और युवा उद्यमिता पर समेकित फोकस किया जाए तो वर्ष 2027 तक भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 2029–30 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य पूरी तरह साध्य है। यह केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि संकल्प, परिश्रम और नीति की जीत होगी।


कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने एक जनपद एक उत्पाद आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। संगोष्ठी को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक पंकज कुमार तथा नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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