यूजीसी नीतियों के विरोध में मधुबन में उभरा जनाक्रोश, सवर्ण समाज सड़कों पर


दुबारी मोड़ से तहसील मुख्यालय तक निकला विरोध मार्च, सरकार से पुनर्विचार की मांग


“शिक्षा व्यवस्था समाज को जोड़ने का माध्यम बने, विभाजन का कारण नहीं” — डॉ. आर.एन. सिंह


बैनर-तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने जताई नाराज़गी, ज्ञापन सौंपकर नीति पर संवाद की अपील


दैनिक इंडिया न्यूज़,मधुबन (मऊ), 8 मार्च। नगर पंचायत मधुबन में रविवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़ी नीतियों को लेकर सवर्ण समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। सवर्ण एकता मंच के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और दुबारी मोड़ से जुलूस निकालते हुए तहसील मुख्यालय तक पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की तथा सरकार से शिक्षा से संबंधित प्रावधानों पर गंभीर पुनर्विचार की मांग की।


प्रदर्शन का नेतृत्व विजय प्रताप सिंह ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता देवेंद्र सिंह ने की। जुलूस के दौरान लोगों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी निर्णय को लागू करने से पूर्व समाज के सभी वर्गों के साथ व्यापक संवाद होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या असंतोष उत्पन्न न हो।


तहसील मुख्यालय पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए डॉ. आर.एन. सिंह ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी नीतियां केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होतीं, बल्कि वे देश की सामाजिक संरचना और भावी पीढ़ी की दिशा निर्धारित करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी नीति को लेकर समाज में आशंका या असंतोष का वातावरण बनता है, तो सरकार का दायित्व है कि वह उस पर गंभीरता से विचार करे और संवाद के माध्यम से समाधान निकाले।


सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान देश के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के केंद्र होते हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था का वातावरण शांत, समावेशी और सकारात्मक होना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी वैचारिक तनाव के अपने अध्ययन और शोध में अग्रसर हो सकें।


देवेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर बढ़ती बेचैनी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यूजीसी से जुड़े प्रावधानों पर व्यापक स्तर पर विमर्श कर ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे समाज के सभी वर्गों में विश्वास और संतुलन बना रहे।


कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा पर भी बल दिया और कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब शिक्षा व्यवस्था सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़े।


इस अवसर पर डॉ. आर.एन. सिंह, चंद्रभूषण सिंह, विद्यासागर सिंह, हंसरनाथ तिवारी, रमन पांडेय, आदर्श पांडेय, हेमंत, श्री किशुन सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। प्रदर्शन के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी से संबंधित नीतियों पर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार करने तथा समाज में उत्पन्न हो रही चिंताओं को दूर करने की मांग की।

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