
योग को आत्मानुशासन से राष्ट्रानुशासन तक ले जाने का आह्वान

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।राजधानी लखनऊ के विजय नगर क्षेत्र में रविवार को योगासन भारत फाउंडेशन, उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी बैठक एवं सम्मान समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन किसी साधारण संगठनात्मक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय योग परंपरा, सांस्कृतिक आत्मबोध और पारंपरिक क्रीड़ा चेतना के पुनर्जागरण का सशक्त वैचारिक मंच बनकर उभरा। आरंभ से अंत तक कार्यक्रम की प्रत्येक कड़ी यह संकेत देती रही कि यह सभा भविष्य की दिशा तय करने वाला विचार-संवाद है, जिसमें शब्द नहीं, संकल्प बोल रहे थे।
कार्यक्रम का वैचारिक आधार महर्षि पतंजलि के इस कालजयी सूत्र— “योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन”—से अनुप्राणित रहा। इस सूत्र की व्याख्या केवल श्लोक-पाठ तक सीमित नहीं रही, बल्कि संपूर्ण आयोजन में उसकी चेतना प्रवाहित होती दिखाई दी। यह स्पष्ट किया गया कि योग चित्त की शुद्धि, वाणी की संयमता और शरीर की सुदृढ़ता का समन्वित विज्ञान है तथा पारंपरिक क्रीड़ाएँ उसी विज्ञान का व्यावहारिक विस्तार हैं, जिनसे राष्ट्र का चरित्र निर्मित होता है।
इस वैचारिक वातावरण के केंद्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक अजय दीप सिंह का नेतृत्व विशेष रूप से प्रभावशाली रहा। उनकी उपस्थिति मात्र औपचारिक नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और प्रशासनिक परिपक्वता का प्रतीक बनी। मीडिया से संवाद करते हुए अजय दीप सिंह ने कहा कि योग भारतीय चेतना से जुड़ने का प्रमुख पथप्रदर्शक है। योग मनुष्य को आत्मानुशासन से राष्ट्रानुशासन की ओर ले जाता है और युवा पीढ़ी के भीतर साहस, धैर्य, कर्तव्यबोध तथा आत्मविश्वास का निर्माण करता है। उनके शब्दों में केवल दर्शन नहीं, दिशा भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
अजय दीप सिंह ने यह भी कहा कि योगासन भारत फाउंडेशन एक संस्था मात्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा को आधुनिक समय से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक योग जीवन का स्वभाव नहीं बनता और पारंपरिक क्रीड़ाएँ राष्ट्रीय स्वाभिमान का स्रोत नहीं बनतीं, तब तक समाज का समग्र उत्थान संभव नहीं है। उनका यह वक्तव्य युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत के रूप में गहराई से प्रभाव छोड़ता रहा।
बैठक में वर्ष 2026 की कार्ययोजना पर विस्तृत एवं गंभीर विमर्श हुआ। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि फाउंडेशन अपनी गतिविधियों को केवल योगासन तक सीमित न रखते हुए मल्लखंभ, खो-खो, कबड्डी, गटका, दंगल, लाठी-कला और शूट बॉक्सिंग जैसे भारतीय पारंपरिक खेलों के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जमीनी स्तर पर संगठित प्रयास करेगा। अजय दीप सिंह के मार्गदर्शन में प्रस्तुत यह कार्ययोजना दूरदर्शिता और व्यवहारिकता का संतुलित उदाहरण प्रतीत हुई।
मुख्य संरक्षक के रूप में अजय दीप सिंह का वर्चस्व बैठक के प्रत्येक निर्णय में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रस्तावित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएँ केवल खेल आयोजन नहीं होंगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को भारतीय पारंपरिक खेलों की राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होंगी। उनकी प्रशासनिक सूझबूझ और वैचारिक दृढ़ता ने संगठन को स्पष्ट लक्ष्य और आत्मविश्वास प्रदान किया।
इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पधारे पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान खिलाड़ियों के चेहरे पर आत्मगौरव और उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया, जो यह संकेत देता था कि संगठन उन्हें केवल मंच नहीं, दिशा भी दे रहा है। कार्यक्रम में फाउंडेशन के मीडिया प्रभारी की भी विशेष रूप से प्रशंसा की गई, जिनके प्रयासों से संगठन की गतिविधियाँ समाज के व्यापक वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुँच रही हैं।
फाउंडेशन के अध्यक्ष युसूफ बेग ने अपने संबोधन में कहा कि अजय दीप सिंह का नेतृत्व संगठन के लिए मार्गदर्शक स्तंभ के समान है। उनके सान्निध्य में योगासन भारत फाउंडेशन खेल संगठन से आगे बढ़कर एक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। इस अवसर पर अवनीश पाण्डेय को उनके सराहनीय कार्यों के लिए अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
महासचिव डॉ. महेश लाल एवं कोषाध्यक्ष आचार्य सुरेश कुमार ने वर्ष 2026 की प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि संगठन का लक्ष्य ग्रामीण और सुदूर अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अजय दीप सिंह के नेतृत्व में संगठन उत्तर प्रदेश में योग और पारंपरिक क्रीड़ाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर राष्ट्रीय कथावाचक आचार्य के.के. तिवारी ने आयोजन के सफल संपन्न होने पर अजय दीप सिंह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि श्री सिंह जैसे कर्तव्यनिष्ठ, प्रतिभाशाली और राष्ट्रचिंतक व्यक्तित्व आज के भारत के लिए अदम्य साहस और प्रेरक नेतृत्व के प्रतीक हैं। यह कथन केवल धन्यवाद नहीं, बल्कि उस विश्वास की अभिव्यक्ति था कि ऐसे नेतृत्व के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति को पुनः प्रतिष्ठित करेगी।
