

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,खनऊ ने आज अपनी सांस्कृतिक चेतना को एक नया आयाम प्रदान किया। पद्म विभूषण से अलंकृत महान साहित्यकार Amritlal Nagar की पुण्यतिथि पर चौक चौराहे का नामकरण “पद्म विभूषण अमृतलाल नागर चौराहा” किए जाने का निर्णय केवल औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान का उद्घोष बनकर सामने आया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए लखनऊ की महापौर Sushma Kharkwal ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह नगर अपनी जड़ों से जुड़कर ही भविष्य की ओर अग्रसर होगा।
अमृतलाल नागर केवल साहित्य के शिल्पी नहीं थे, वे लखनऊ की जीवंत आत्मा थे। उनकी लेखनी में चौक की गलियों की गूंज, नवाबी तहज़ीब की सौम्यता, जनजीवन की सहजता और इतिहास की गहराई आज भी स्पंदित होती है। उनके नाम पर यह चौराहा स्थापित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी प्रतीक बनेगा—एक ऐसा स्मारक, जो बताता रहेगा कि शब्दों की शक्ति शहरों की पहचान गढ़ सकती है।
इस सांस्कृतिक संकल्प के साथ ही विकास की धारा को भी गति प्रदान की गई। चौक क्षेत्र में अनेक आधारभूत परियोजनाओं का शिलान्यास कर यह स्पष्ट कर दिया गया कि विरासत और विकास परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। कोनेश्वर मंदिर से मिर्जा मंडी तक सीसी मार्ग निर्माण, अमृतलाल नागर कोठी से एमवी हॉस्पिटल मार्ग का सुदृढ़ीकरण, सोंधी टोला में पार्क का सौंदर्यीकरण, चम्पूजी मंदिर से शंकरी टोला तक सड़क निर्माण, कालीजी बाजार में भूमिगत नाला तथा लाजपत नगर में नाला एवं सीसी रोड निर्माण जैसे कार्य नागरिक सुविधा, स्वच्छता और सुगम आवागमन की दृष्टि से आरंभ किए जा रहे हैं।
यह पहल केवल अधोसंरचना निर्माण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण का परिचायक है जिसमें नगर की सांस्कृतिक अस्मिता और आधुनिक आवश्यकताओं का संतुलित समन्वय निहित है। महापौर की सक्रियता और स्पष्ट प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि लखनऊ की पहचान केवल इमारतों और मार्गों से नहीं, बल्कि अपने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महापुरुषों के सम्मान से भी निर्मित होती है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और व्यापारिक समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि यह निर्णय जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है। जब नगर का नेतृत्व सांस्कृतिक गौरव और विकास को समान महत्व देता है, तो नागरिकों का विश्वास स्वतः सुदृढ़ होता है।
यह समाचार केवल एक नामकरण समारोह की सूचना नहीं है; यह उस विचारधारा का प्रतिरूप है जिसमें अतीत का सम्मान, वर्तमान का सुदृढ़ीकरण और भविष्य का निर्माण एक साथ साधा जाता है। अमृतलाल नागर को दी गई यह श्रद्धांजलि वस्तुतः लखनऊ की आत्मा को नमन है—और साथ ही स्वच्छ, सुंदर, संस्कारित तथा गौरवशाली राजधानी के निर्माण का प्रेरक आह्वान भी।
