
लखनऊ में 200 से अधिक लाभार्थियों को वितरित हुए स्मार्ट केन, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र और व्हीलचेयर

नेताओं ने कहा – यह सिर्फ उपकरण नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ाया गया कदम

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। मोहन रोड स्थित स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज सोमवार को मानो उम्मीद और मुस्कान का केंद्र बन गया। सेवा पखवाड़ा 2025-26 के अंतर्गत यहां दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा आयोजित उपकरण वितरण कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्र-छात्राओं और लाभार्थियों को आधुनिक सहायक उपकरण दिए गए। स्मार्ट केन, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र, व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल जैसे उपकरण पाकर दिव्यांगजनों के चेहरे खिल उठे।

वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज सिंह, राज्यसभा सांसद संजय सेठ और लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने सामूहिक रूप से इन उपकरणों का वितरण किया। इस अवसर पर नीरज सिंह ने कहा, “दिव्यांगजन समाज के अभिन्न अंग हैं। सरकार का प्रयास है कि उन्हें केवल सहारा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मानजनक जीवन जीने की शक्ति दी जाए। स्मार्ट केन और ब्रेल किट जैसे उपकरण उनके लिए नई राह खोलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘समावेशी भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी दिव्यांगजन पीछे न छूटे।”
राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने कार्यक्रम को “सकारात्मक बदलाव की मिसाल” बताते हुए कहा, “जब समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। आज का यह आयोजन दिखाता है कि आधुनिक तकनीक दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी का अवसर दे सकती है। यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम है।”
भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने इसे संवेदनशील समाज की पहचान बताते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी की सरकार सदैव वंचितों और ज़रूरतमंदों के साथ खड़ी रही है। दिव्यांगजन हमारे समाज की धरोहर हैं। उन्हें उचित अवसर और साधन उपलब्ध कराना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।”
इस मौके पर मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग ने बताया कि कार्यक्रम में अंजनी श्रीवास्तव, राम अवतार कनौजिया, सत्येंद्र सिंह, अखिलेश सिंह (उपनिदेशक, दिव्यांगजन विभाग, लखनऊ मंडल) और शशांक सिंह (जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, लखनऊ) भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर बच्चों और लाभार्थियों की मुस्कान ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आयोजन केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय लिख गया। सेवा पखवाड़ा ने एक बार फिर दिखाया कि संवेदनशील राजनीति और सामूहिक प्रयास से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
