
दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी लखनऊ महानगर द्वारा सहकारिता भवन में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित प्रोफेशनल सम्मेलन में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि “यह अमृतकाल भारत के भविष्य निर्माण का निर्णायक कालखंड है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से जो पाँच प्राण रखने का आह्वान किया है, वे भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आधारशिला हैं।”

उन्होंने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व और सामूहिक कर्तव्य-भाव—ये तीन मूल तत्व भारत को आत्मनिर्भरता के नए शिखर तक ले जाएंगे। जब तक हम दूसरों पर निर्भर रहेंगे, आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य चुनौती बना रहेगा।”

“अमेरिका भी भारतीय दक्षता पर निर्भर”—H-1B वीजा का उदाहरण
सुधांशु त्रिवेदी ने H-1B अमेरिकी वीजा का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया की सबसे विकसित आर्थिक शक्ति अमेरिका भी आज भारतीय कौशल पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि “अमेरिका हर वर्ष लगभग एक लाख हाई-स्किल्ड वीजा जारी करता है, जिसमें करीब 70% भारतीयों को मिलते हैं। यह भारत की क्षमता का प्रमाण है कि आज वहाँ भी माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिभाएँ अमेरिकी नौकरियाँ अपने कौशल के दम पर हासिल कर रही हैं।”
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की रक्षा-आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण
उन्होंने कहा कि हाल ही के ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने ब्रह्मोस सहित अधिकांश स्वदेशी रक्षा तकनीक का उपयोग किया, जबकि पाकिस्तान विदेशी उपकरणों पर निर्भर रहा।
“यह फर्क बताता है कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी अत्यावश्यक है।”
“आत्मनिर्भरता के कई आयाम—आर्थिक, सामरिक, ऊर्जा, खाद्यान्न और वैचारिक”
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ उद्योगों या रक्षा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, खाद्यान्न, स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और वैचारिक स्तर पर भी आत्मनिर्भर होना होगा।
“यदि हमारे अंदर आत्मविश्वास नहीं होगा तो हम पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं हो सकते।”
अंग्रेज़ी की अनिवार्यता समाप्त—भाषाई विविधता बढ़ी
त्रिवेदी ने बताया कि आजादी के बाद 1977 तक ऑल इंडिया सर्विसेज की परीक्षाएं सिर्फ अंग्रेज़ी में होती थीं।
“अटल जी की सरकार ने अंग्रेज़ी की अनिवार्यता समाप्त की और आज मोदी सरकार ने इंजीनियरिंग-मेडिकल की पढ़ाई 8–9 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर भाषा-आधारित बाधाओं को दूर कर दिया है।”
उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे—“आज भारतीय वेशभूषा या भाषा को पिछड़ेपन की दृष्टि से देखने वाली सोच खत्म हो चुकी है।”
- दीपावली हो या डिजिटल इंडिया—स्वदेशी की ओर बढ़ रहा देश
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश में दीपावली जैसे पर्व भी “स्वदेशी उत्पादों” के साथ मनाने की भावना मजबूत हुई है। ऊर्जा, डिजिटल ट्रांजेक्शन, सेमीकंडक्टर चिप, मेडिकल टेक्नोलॉजी, खाद्यान्न, डिफेंस—हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
“गौरवशाली था भूत, भविष्य भी महान है…”
अपने उद्बोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा—“गौरवशाली था भूत, भविष्य भी महान है,अगर आप संभालें उसे—जो वर्तमान है।”
सम्मान समारोह एवं मौजूद गण
अभियान प्रदेश संयोजक बृज बहादुर, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और कार्यक्रम संयोजक अभिषेक खरे ने सुधांशु त्रिवेदी को आत्मनिर्भर भारत स्मृति-चिन्ह प्रदान किया। महानगर द्वारा आत्मनिर्भर भारत ब्रांड एंबेसडर के रूप में मनोनीत डॉ. संदीप गुप्ता, मणिपाल पब्लिक कॉलेज की प्राचार्य स्मिता सिंह एवं डॉ. अभिषेक बंसल को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में व्यापारी नेता संदीप बंसल, महामंत्री राम अवतार कनौजिया, घनश्याम अग्रवाल, टिंकू सोनकर, आर.के. चारी, के.के. मिश्रा, मयंक बाजपाई, दीपा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
