
वॉरियर्स डिफेन्स एकेडमी में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के सान्निध्य में भव्य सुंदरकांड आयोजन

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।नववर्ष के प्रथम दिवस पर लखनऊ जनपद के मोहनलालगंज स्थित वॉरियर्स डिफेन्स एकेडमी परिसर में एक विशेष आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ। राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों छात्रों ने सामूहिक रूप से श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ कर नववर्ष का स्वागत भारतीय परंपरा के अनुरूप किया।

प्रातः काल से ही एकेडमी परिसर में भक्तिमय वातावरण व्याप्त था। सुप्रसिद्ध भजन गायक पंडित ओंकार शंखधर द्वारा सुंदरकांड का भावपूर्ण और संगीतमय पाठ प्रस्तुत किया गया, जिसमें चौपाइयों के साथ भक्ति और अनुशासन का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर हुआ। “जय श्रीराम” और “पवनपुत्र हनुमान की जय” के उद्घोषों से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह ने छात्रों को राष्ट्रीय चेतना, सनातन मूल्यों और राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पवनपुत्र हनुमान जी का जीवन समर्पण, निष्ठा और लक्ष्यबद्ध पुरुषार्थ का आदर्श उदाहरण है, जिससे प्रेरणा लेकर युवा अपने जीवन को अनुशासन और सेवा के पथ पर अग्रसर कर सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि विद्यार्थी अपनी शिक्षा और साधना को राष्ट्रसेवा से जोड़ें, यही सच्चा नववर्ष संकल्प होगा।
कार्यक्रम में वॉरियर्स डिफेन्स एकेडमी के प्रबंध निदेशक श्री गुलाब सिंह, समस्त शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। पंडित संजीव नारायण चतुर्वेदी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। सुंदरकांड पाठ के उपरांत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने वातावरण को श्रद्धा और आत्मबल से भर दिया।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में सनातन धर्मप्रेमी श्रद्धालुजन भी उपस्थित रहे। अंग्रेजी नववर्ष को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का यह प्रयास युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों को प्रसाद स्वरूप भोजन वितरित किया गया।
समग्र रूप से यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि युवाओं में सनातन संस्कार, राष्ट्रीय चेतना और आत्मानुशासन के बीजारोपण का सशक्त माध्यम बना, जिसने नववर्ष को सार्थक दिशा प्रदान की।
