उपनयन संस्कार में सहभागी बने प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, सनातन संस्कारों के संरक्षण का दिया संदेश


दैनिक इंडिया न्यूज, मधुबन (मऊ)।सनातन परंपरा की दिव्य चेतना से ओत-प्रोत मधुबन क्षेत्र उस समय विशेष रूप से गौरवान्वित हुआ, जब उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान शुक्रवार सायं स्थानीय तहसील अंतर्गत भठिया निवासी पवन कुमार पाण्डेय के सुपुत्र प्रशांत कुमार पाण्डेय ‘ओम जी’ के पावन उपनयन संस्कार में सहभागी बने और उन्हें मंगलकामनाओं सहित आशीर्वाद प्रदान किया।


इस गरिमामय अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि उपनयन संस्कार सनातन धर्म की आत्मा है, जो व्यक्ति को अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि यह संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों के संवर्धन की आधारशिला है, जिसका पालन प्रत्येक हिंदू परिवार को अपनी परंपराओं के अनुरूप अवश्य करना चाहिए।


अपने वक्तव्य में मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ सर्वांगीण विकास को समान महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में प्रत्येक धर्म और परंपरा को सम्मान देते हुए विकास की ऐसी सुदृढ़ नींव रखी गई है, जो प्रदेश को निरंतर प्रगति के पथ पर ले जा रही है।


मधुबन क्षेत्र के विकास कार्यों की चर्चा करते हुए मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि विधायक कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में विकास की गति को नई दिशा मिली। करोड़ों रुपये की लागत से फायर ब्रिगेड स्टेशन की स्थापना, तीन जनपदों को आपस में जोड़ने वाले मधुबन–परसिया मार्ग का निर्माण, राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति द्वार जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य क्षेत्र की विकासात्मक पहचान बने हैं।


कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें प्रतिनिधि शिवप्रकाश उपाध्याय ‘सुब्बी’, पूर्व विधायक उमेश चंद्र पाण्डेय, ब्लॉक प्रमुख दोहरीघाट प्रदीप कुमार राय ‘राजू’, बड़राव प्रमुख प्रतिनिधि आद्याशंकर मिश्र, प्रमुख प्रतिनिधि प्रवीण कुंवर सिंह ‘शुभम’, देवेन्द्र चौहान, देवेन्द्र सिंह, राजेंद्र सिंह, राहुल दीक्षित सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


उपनयन संस्कार का यह आयोजन केवल एक पारिवारिक धार्मिक प्रसंग न रहकर सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और विकासोन्मुख राजनीति के संगम के रूप में उभरकर सामने आया—जिसने क्षेत्र में सकारात्मक संदेश और गहरी छाप छोड़ी।

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