
वर्षों की अनदेखी, जर्जर अधोसंरचना और निराशा के बीच आशा का उदय
उपेक्षा से उत्कर्ष तक : लोहिया नगर वार्ड में जनविश्वास के पुनर्जागरण की प्रेरक गाथा
दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ। राजधानी के विकासशील भूगोल में स्थित विकास नगर सेक्टर–2 का लेखराज इंक्लेव, रोहित अपार्टमेंट परिक्षेत्र कभी ऐसी प्रशासनिक विडंबना का प्रतीक बन चुका था, जहाँ योजनाएँ थीं पर क्रियान्वयन का स्पर्श नहीं। तीन कार्यकालों की लंबी प्रतीक्षा के बावजूद जर्जर मार्ग, सीवर व्यवस्था का अभाव और सर्वत्र फैली अव्यवस्था ने नागरिकों को यह मान लेने पर विवश कर दिया था कि उनका परिक्षेत्र प्राथमिकताओं की सूची से बाहर है।
वर्षा ऋतु इस पीड़ा को और गहरा कर देती थी। मार्ग दलदल में परिवर्तित हो जाते, जलभराव से दुर्गंध वातावरण को आच्छादित कर लेती और नागरिक जीवन बाधित हो जाता। नियोजित कॉलोनी का स्वरूप ऐसा प्रतीत होता मानो वह उपेक्षा की परछाईं में जी रही हो। धीरे-धीरे लोगों ने अपेक्षाएँ सीमित कर लीं—“यहाँ परिवर्तन संभव नहीं”—यह भावना सामान्य हो चली थी।
ऐसे परिवेश में लोहिया नगर वार्ड के पार्षद राकेश मिश्रा ने स्थिति को औपचारिक शिकायत नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व के रूप में ग्रहण किया। उन्होंने आश्वासन के स्थान पर ठोस प्रक्रिया को प्राथमिकता दी। विभागीय समन्वय, सतत अनुवर्तन और कार्य की निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप वह कार्य आरंभ हुआ, जिसकी कल्पना तक लोगों ने त्याग दी थी।
विधिवत सीवर लाइन बिछाई गई, जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण संपन्न हुआ और स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया। परिवर्तन केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं रहा—उसने नागरिक मनोभूमि को भी स्पर्श किया। जिन परिवारों ने वर्षों तक असुविधा झेली, वे आज व्यवस्थित मार्गों और स्वच्छ परिवेश को देख संतोष व्यक्त कर रहे हैं। बस्तियों में रहने वाले लोगों के चेहरे पर जो स्वाभाविक प्रसन्नता झलक रही है, वही इस परिवर्तन का वास्तविक प्रमाण है।
मीडिया से संवाद करते हुए राकेश मिश्रा ने इस कार्य को सामूहिक नेतृत्व और प्रेरणा का परिणाम बताया। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि “हम सब अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि हमें उनके संसदीय क्षेत्र में, उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में कार्य करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र का सौभाग्य है।” उन्होंने उल्लेख किया कि राष्ट्रहित और विकास के प्रति समर्पित दृष्टिकोण ही स्थानीय स्तर पर भी कार्य-संस्कृति को प्रेरित करता है।
स्थानीय नागरिकों का भी यही मत है कि जब राष्ट्रीय नेतृत्व विकास की स्पष्ट दिशा देता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर तक अनुभव किया जाता है। लोगों का कहना है कि यह परिवर्तन केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्स्थापना है—यह संकेत है कि यदि इच्छाशक्ति और उत्तरदायित्व साथ हों, तो वर्षों की उपेक्षा भी परास्त हो सकती है।
विकास नगर की यह गाथा राजधानी के लिए एक संदेश है—जनप्रतिनिधित्व का वास्तविक अर्थ पद की औपचारिकता नहीं, बल्कि जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील प्रतिबद्धता है। और जब स्थानीय प्रयासों को सुदृढ़ राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन प्राप्त हो, तब परिवर्तन केवल संभव नहीं, बल्कि स्थायी और प्रेरक बन जाता है।
