
दोनों उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक सहित सर्वधर्म प्रतिनिधियों की स्नेहमयी सहभागिता

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ। राजधानी के विभूति खंड, गोमती नगर स्थित वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज सिंह के आवास के समक्ष आईएमआरटी बिजनेस स्कूल के विशाल प्रांगण में आयोजित होली मंगल मिलन समारोह केवल एक पारंपरिक उत्सव भर नहीं था, अपितु वह सामाजिक समरसता, राजनीतिक सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना का सजीव उत्सव बनकर उपस्थित हुआ। रंग, राग और रस से परिपूर्ण यह आयोजन प्रारंभ होते ही जनमानस को अपनी ओर आकृष्ट करने लगा।
समारोह की गरिमा उस समय और अधिक उदात्त हो उठी जब प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य एवं बृजेश पाठक—अपने सान्निध्य से कार्यक्रम को आलोकित करने पहुँचे। उनके साथ दयाशंकर सिंह, दानिश आज़ाद अंसारी, दिनेश शर्मा सहित अनेक मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। विविध सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को सर्वस्पर्शी आयाम प्रदान किया।
मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग के अनुसार कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल जी, विभाग प्रचारक अनिल जी, एमएलसी मुकेश शर्मा, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक ओपी श्रीवास्तव, मनीष रावत, अमरेश कुमार, एमएलसी रामचंद्र प्रधान, पवन सिंह चौहान, अपर्णा यादव, नितिन गोयल, सीएमओ एन.बी. सिंह, हरेंद्र, प्रशांत भाटिया सहित अनेकों गणमान्य व्यक्तित्व, पार्टी पदाधिकारी, पार्षदगण, मंडल अध्यक्ष एवं सहस्रों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जनसमूह की यह विराट उपस्थिति इस तथ्य का प्रमाण थी कि यह आयोजन केवल राजनीतिक न होकर व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता का प्रतीक बन चुका था।
अतिथियों के स्वागत का दृश्य स्वयं में मनोहारी था। नीरज सिंह ने गुलाल अर्पित कर एवं रंगवर्णित अंगवस्त्र ओढ़ाकर मुख्य अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन किया। परस्पर आलिंगन, सौहार्दपूर्ण मुस्कान और शुभकामनाओं की गूंज ने वातावरण को ऐसा सरस बना दिया मानो समूचा परिसर एक ही भावधारा में अवगाहित हो गया हो।
इसके उपरांत ‘फूलों की होली’ का मनोरम दृश्य उपस्थित हुआ। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, नीरज सिंह तथा अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा पुष्पवृष्टि के मध्य खेली गई यह होली उत्सव को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान कर गई। रंगों के साथ पुष्पों की सुगंध ने मानो समूचे वातावरण को पवित्रता और प्रेम से अभिसिंचित कर दिया।
मंच पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक होली गीतों और भक्तिमय रचनाओं ने समारोह को और अधिक प्राणवान बना दिया। स्वर, ताल और लय के संगम पर उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर झूम उठा। गुलाल की उड़ती आभा और उल्लास से भरे जयघोषों ने रंगोत्सव को चरम उत्कर्ष तक पहुँचा दिया।
उत्सव के मध्य पारंपरिक व्यंजनों—गुजिया, ठंडाई एवं विविध चाट-पकवानों—का रसास्वादन करते हुए अतिथियों ने आत्मीय संवाद का आनंद लिया। यह केवल स्वाद का नहीं, अपितु आत्मीय संबंधों के पुनर्स्मरण और सुदृढ़ीकरण का अवसर भी था।
अपने उद्बोधन में नीरज सिंह ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि समरसता, सद्भाव और सामाजिक ऐक्य का महापर्व है। उन्होंने कामना की कि यह रंगोत्सव प्रत्येक हृदय में प्रेम, प्रत्येक परिवार में प्रसन्नता और प्रत्येक नागरिक के जीवन में समृद्धि एवं सद्बुद्धि का संचार करे।
देर रात्रि तक चलने वाला यह आयोजन अंततः एक सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ—सर्वधर्म सहभागिता, सामाजिक एकात्मता और पारस्परिक बंधुत्व का। उपस्थित जनसमूह जब परस्पर आलिंगनबद्ध होकर विदा हुआ, तब यह स्पष्ट था कि यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का सुदृढ़ीकरण था, जिसकी स्मृति लंबे समय तक जनमानस में अंकित
