
महिलाओं से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता और प्राथमिकी दर्ज करने में किसी प्रकार की शिथिलता न बरतने की हिदायत

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,मऊ। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उत्पीड़न से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग की सदस्या गीता बिन्द की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को सीधे सुनकर उनके शीघ्र समाधान हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को न्यायिक संरक्षण प्रदान करते हुए प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।
जनसुनवाई के दौरान कुल ग्यारह प्रकरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें मुख्य रूप से घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर प्रताड़ना तथा पुलिस द्वारा अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने से संबंधित शिकायतें सम्मिलित थीं। प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए राज्य महिला आयोग ने संबंधित अधिकारियों को तथ्यात्मक परीक्षण कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
राज्य महिला आयोग की सदस्या ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता का परिचय दिया जाए तथा प्राथमिकी दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता या उदासीनता स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनसुनवाई के दौरान उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान की सुरक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसी भी महिला को अन्याय या उत्पीड़न सहने की आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा संचालित सहायता सेवाओं और आयोग की उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग कर महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएँ।
इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी श्वेता त्रिपाठी, बाल विकास परियोजना अधिकारी राधेश्याम पाल, महिला थाना प्रभारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। जनसुनवाई का वातावरण अत्यंत गंभीर और संवेदनशील रहा, जहाँ प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए न्यायोचित समाधान की दिशा में ठोस पहल की गई।
