
धर्मांतरण–लव जिहाद से लेकर नियुक्तियों तक पर एसटीएफ जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में सामने आए धर्मांतरण और तथाकथित लव जिहाद प्रकरण को लेकर विश्व हिन्दू परिषद ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के समक्ष आक्रामक रुख अपनाया है। विहिप ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कई संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
विश्व हिन्दू परिषद ने स्मरण कराया कि केजीएमयू में धर्मांतरण और लव जिहाद के आरोपों को लेकर सबसे पहले उसने ही आंदोलन किया था, जिसके बाद आरोपी रमीज मलिक को विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया, उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और उस पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी हुई। इसके अतिरिक्त वाहिद अली को लैब इंचार्ज पद से हटाया गया तथा विहिप के दबाव के बाद पूरे प्रकरण की जांच एसटीएफ को सौंपी गई।
इसके बावजूद विहिप का कहना है कि विश्वविद्यालय में अभी भी कई ऐसे गंभीर प्रश्न अनुत्तरित हैं, जिन पर सरकार की तत्काल हस्तक्षेपात्मक कार्रवाई आवश्यक है। ज्ञापन में सैयद अख्तर अब्बास नामक व्यक्ति को लेकर तीखे सवाल उठाए गए। संगठन ने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी असाधारण योग्यता है, जिसके चलते उक्त व्यक्ति को सेवानिवृत्ति के बाद भी विश्वविद्यालय में दायित्व देकर कुलपति का ओएसडी बनाए रखा गया है। विहिप ने इसे पूर्णतः अनुचित बताते हुए तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि सैयद अख्तर अब्बास पर पूर्व में नियुक्तियों से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं, साथ ही उन्हें नियम विरुद्ध ढंग से एड-हॉक कार्मिक से सेवानिवृत्तक लाभ और पेंशन दिए जाने की भी शिकायतें हैं। संगठन ने मांग की है कि इन सभी बिंदुओं की जांच एसटीएफ अथवा प्रदेश सरकार की किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर समस्त धनराशि की रिकवरी के साथ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी समान रूप से कार्रवाई की जाए।
विश्व हिन्दू परिषद ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच केजीएमयू में हुई नियमित, एड-हॉक, नर्सिंग तथा अन्य सभी प्रकार की नियुक्तियों की भी व्यापक जांच की मांग की है। इसके साथ ही लव जिहाद और धर्मांतरण से पीड़ित युवती अथवा उसके परिजनों द्वारा यदि पूर्व में विश्वविद्यालय प्रशासन या किसी अधिकारी-कर्मचारी से संपर्क किया गया था और मामले को दबाने का प्रयास हुआ, तो उसकी भी एसटीएफ से जांच कराने की मांग उठाई गई है। ज्ञापन में कुलपति कार्यालय के बाहर धार्मिक वेश में एक विशेष वर्ग से जुड़े व्यक्ति की वायरल तस्वीर पर भी कार्रवाई की मांग शामिल है।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप ने कहा कि शैक्षिक परिसरों में लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी घटनाएं किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विहिप शांतिपूर्ण ढंग से सरकार से कार्रवाई की मांग कर रही है, किंतु यदि मांगों की अनदेखी की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद हिन्दू समाज के प्रत्येक सदस्य के साथ खड़ी है और किसी भी संकट में संगठन उनका परिवार है।
विहिप बजरंग दल के जिला संगठन मंत्री समरेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “कुलपति का अब्बास प्रेम कहीं केजीएमयू की छवि को पूरी तरह धूमिल न कर दे।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अब्बास में ऐसा क्या विशेष है, जो उसे बार-बार संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने दो दिनों के भीतर मांगें मानने का आश्वासन दिया है, इसी कारण सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन सौंपा गया। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे और आवश्यकता पड़ी तो सड़क से राजभवन तक कूच किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी केजीएमयू की कुलपति की होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है—जिस संकल्प को विहिप और बजरंग दल ने ठान लिया, वह होकर ही रहता है।
इस दौरान दर्जनों कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए संगठन के समर्थन में आवाज बुलंद की। कार्यक्रम में गणेश शंकर पवार, रचित दुबे, आशीष अवस्थी, बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम सिंह गौर, जिला सह संयोजक दीपक साहू, मोहित गुप्ता, शिवहरि सिंह, जितेंद्र धानुक, नीरज शर्मा, ऋषभ कुमार, सूरज सिंह, प्रेम यादव, राम सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, केजीएमयू प्रकरण अब केवल विश्वविद्यालय तक सीमित न रहकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई निर्णायक मानी जाएगी?
