
गायत्री परिवार आध्यात्मिक जागरण का कर रहा है कार्य : मुख्यमंत्री

दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली।हरिद्वार स्थित शांतिकुंज की तपोभूमि एक बार पुनः उस क्षण की साक्षी बनी, जब भारत की सनातन आत्मा ने समकालीन विश्व को दिशा देने का उद्घोष किया। अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का संबोधन केवल एक औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारतीय परंपराओं की सार्वकालिक शक्ति और वैश्विक प्रासंगिकता का निर्भीक उद्घाटन था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज जिस वैचारिक, नैतिक और सामाजिक संकट से विश्व जूझ रहा है, उसका समाधान किसी आयातित सिद्धांत में नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा में निहित है।

अपने ओजस्वी उद्बोधन में गृह मंत्री ने गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिक और राष्ट्रनिष्ठ मानव के निर्माण की प्रयोगशाला है। उन्होंने आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि गुरुदेव ने सनातन धर्म में व्याप्त जड़ता और विकृतियों को दूर कर उसे पुनः जीवन्त, वैज्ञानिक और सामाजिक सरोकारों से युक्त स्वरूप प्रदान किया।

श्री अमित शाह ने कहा कि आचार्य श्रीराम शर्मा ने आध्यात्मिकता को पलायन नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम बनाया। उन्होंने समानता, सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को भारतीय जीवन-मूल्यों के केंद्र में स्थापित किया। “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण” का सूत्र कोई सैद्धांतिक नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में उतरा हुआ जीवन-दर्शन है, जिसने करोड़ों लोगों के चिंतन और चरित्र को दिशा दी है। गुरुदेव का संदेश—“हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा”—आज भी मानव कल्याण का सबसे प्रामाणिक मंत्र है, जिसे जन-जन तक पहुँचाना समय की मांग है।

गृह मंत्री ने विगत एक दशक में देश की कार्य-संस्कृति और राष्ट्रीय सोच में आए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत अपनी गौरवशाली विरासत, सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन-मूल्यों के कारण वैश्विक मंच पर सम्मान के साथ देखा जा रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे युगद्रष्टाओं का स्मरण करते हुए कहा कि भारत का उत्कर्ष केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है—भारत के उत्थान से सम्पूर्ण मानवता का कल्याण सुनिश्चित होता है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि हरिद्वार में प्रवेश करते ही आध्यात्मिक अनुभूति स्वतः जाग्रत हो जाती है और गायत्री मंत्र मानव के अंतःकरण में सद्भाव, राष्ट्रसेवा और लोकमंगल की चेतना को प्रज्वलित करता है। विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आत्म-सुधार से बड़ा कोई सामाजिक कार्य नहीं हो सकता। यदि युवा स्वयं को गढ़ ले, तो राष्ट्र स्वतः सशक्त हो जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार एक विराट वटवृक्ष के समान है, जो अपनी छाया में समाज को शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी सनातन संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित कर रहा है और यह आवश्यक है कि इस विराट सांस्कृतिक संदेश को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं। उन्होंने गायत्री परिवार को आध्यात्मिक जनजागरण का अग्रदूत बताया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का दर्शन समाज से विमुख होने का नहीं, बल्कि समाज में रहकर उसके उत्थान का है। उन्होंने कहा कि संस्थान वेद, उपनिषद और श्रीमद्भगवद्गीता से प्रेरणा लेकर आधुनिक तकनीक के साथ शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन धर्म की रक्षा राष्ट्रधर्म की रक्षा से पृथक नहीं हो सकती।
इस ऐतिहासिक अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री श्री दया शंकर सिंह, विधायक श्री मदन कौशिक सहित देश-विदेश से आए असंख्य गायत्री साधक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। शांतिकुंज से उठी यह वैचारिक चेतना स्पष्ट संकेत है कि भारत का भविष्य सत्ता या साधनों से नहीं, बल्कि संस्कार, साधना और संकल्प से सुरक्षित होगा।
