
हरेंद्र सिंह दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। लखनऊ की धरती आज केवल एक लोकार्पण की साक्षी नहीं बनी, बल्कि राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का मंच बन गई। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती, सुशासन दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बसंत कुंज योजना, सेक्टर-जे में 230 करोड़ रुपये की लागत से 65 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित भव्य ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का लोकार्पण कर इतिहास के स्वर्णिम अध्याय में एक नया पृष्ठ जोड़ा। यह स्थल केवल स्थापत्य का नमूना नहीं, बल्कि भारत की वैचारिक आत्मा, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रधर्म का मूर्त रूप बनकर सामने आया।


इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व की ऊँचाई प्रदान की। जैसे ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन हुआ, ऐसा प्रतीत हुआ मानो राष्ट्र की चेतना स्वयं अपने महापुरुषों के चरणों में नतमस्तक हो गई हो।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊँची भव्य प्रतिमाओं का लोकार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इन ऊँची प्रतिमाओं को देखकर यह अनुभूति सहज ही मन में उतर आई कि इन महापुरुषों की ऊँचाई केवल शिल्प में नहीं, बल्कि विचार, त्याग और राष्ट्रसेवा में अनंत है। प्रधानमंत्री ने म्यूजियम का भी लोकार्पण किया और भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र प्रेरणा स्थल के निर्माण और उसके वैचारिक आधार पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को अतीत, वर्तमान और भविष्य के भारत की यात्रा करा दी। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्र प्रेरणा स्थल तथा क्रिसमस की शुभकामनाएँ देते हुए इस स्थल को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बताया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लखनऊ की भूमि एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस विचारधारा का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने अटल जी की पंक्तियों का स्मरण कराते हुए कहा कि यह स्थल हमें सिखाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या और निरंतर कर्म से होता है। हर कदम, हर प्रयास राष्ट्र के लिए समर्पित होना चाहिए—यही विकसित भारत का मूल मंत्र है।
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी पूरी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस भूमि पर आज राष्ट्र प्रेरणा स्थल खड़ा है, वहाँ कभी कूड़े-कचरे का पहाड़ था। दशकों से उपेक्षित इस क्षेत्र को तीन वर्षों के अथक प्रयासों से प्रेरणा के केंद्र में बदल दिया गया। यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक और वैचारिक परिवर्तन का भी प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश की प्रगति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का लाभ प्रदेश को स्पष्ट रूप से मिल रहा है। कभी कानून-व्यवस्था के लिए बदनाम रहने वाला उत्तर प्रदेश आज विकास, पर्यटन और निवेश के लिए जाना जा रहा है। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और राष्ट्र प्रेरणा स्थल जैसे निर्माण प्रदेश की नई पहचान गढ़ रहे हैं। उन्होंने कामना की कि उत्तर प्रदेश सुशासन, समृद्धि और सामाजिक न्याय का आदर्श मॉडल बने।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने भारत की अखंडता के लिए निर्णायक संघर्ष किया। ‘एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान’ का उद्घोष आज साकार हो चुका है। अनुच्छेद 370 का हटना केवल एक संवैधानिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की पुनर्स्थापना है। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की जो नींव रखी थी, उसी का विस्तार आज आत्मनिर्भर भारत के रूप में हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को वर्तमान शासन की आत्मा बताते हुए कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचना ही सच्चा सुशासन है। संतृप्तिकरण की नीति भेदभाव को समाप्त करती है और यही वास्तविक सामाजिक न्याय है। करोड़ों नागरिकों को आवास, जल, बिजली, गैस, मुफ्त अनाज और स्वास्थ्य सुविधा मिलना इसी दर्शन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सुशासन को नारों से निकालकर धरातल पर उतारने का श्रेय अटल जी को जाता है। डिजिटल पहचान, दूरसंचार क्रांति, सड़कों और कनेक्टिविटी का विस्तार—आज का आधुनिक भारत उसी नींव पर खड़ा है। उत्तर प्रदेश का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी बनना अटल जी के विजन का ही विस्तार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इतिहास के हर सपूत को सम्मान देने का संकल्प लिया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव और चौरी-चौरा के शहीद—इन सभी को उनका यथोचित सम्मान दिलाया गया है। यह भारत किसी एक परिवार या विचारधारा का नहीं, बल्कि हर त्याग और बलिदान का उत्तराधिकारी है।
कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल महापुरुषों की विरासत को नमन करने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करेगा।
समारोह के अंत में यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत के आत्मबोध, राष्ट्रगौरव और भविष्य के संकल्पों का जीवंत घोष है। लखनऊ की इस भूमि से उठी यह प्रेरणा आने वाले समय में करोड़ों भारतीयों को कर्म, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म के पथ पर अग्रसर करेगी।
