
राष्ट्रीय सनातन महासंघ ने कथा व्यास को किया सम्मानित
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।महाशिवरात्रि की पुण्य पूर्वरात्रि में कोयलीपुर ग्राम की पावन धरती पर ऐसा दिव्य आध्यात्मिक आलोक अवतरित हुआ, जिसने जनमानस के अंतःकरण को ज्योतिर्मय कर दिया। ग्राम का प्रत्येक मार्ग, प्रत्येक गृह और प्रत्येक हृदय एक अदृश्य दिव्य स्पंदन से अनुप्राणित प्रतीत हो रहा था। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु शब्दब्रह्म का साक्षात् अवतरण था, जहाँ उच्चरित प्रत्येक अक्षर आत्मा को उसकी मौलिक पवित्रता का बोध करा रहा था। कथा का आरंभ होते ही श्रद्धालुओं की चेतना किसी ऊर्ध्वगामी आध्यात्मिक यात्रा पर अग्रसर होने लगी।
भागीरथी का पावन स्मरण देह को शुद्ध करता है, किंतु श्रीमद्भागवत की वाणी आत्मा का महापरिष्कार करती है। जब कथा व्यास नीतू जी के श्रीमुख से “ मंगलोच्चार गूँजा, तब ऐसा प्रतीत हुआ मानो वेदों का सार अमृतधारा बनकर सभा में प्रवाहित हो उठा हो। तत्पश्चात “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे” का दिव्य उद्घोष वातावरण में व्याप्त हुआ, तो उपस्थित जनसमुदाय के अंतःकरण में भक्ति का ऐसा दीप प्रज्वलित हुआ, जिसकी आभा ने संशय और संकुचन के समस्त आवरणों का क्षय कर दिया। श्रोता केवल श्रवण नहीं कर रहे थे; वे भीतर से रूपांतरित हो रहे थे।
कथा का प्रवाह जब भगवान की लीला-माधुरी, करुणा और अनुग्रह के सूक्ष्म निरूपण तक पहुँचा, तब सभा में एक गंभीर, किंतु आनंदमय मौन छा गया—ऐसा मौन जिसमें शब्दों से अधिक अनुभूति का संचार होता है। अनेक नेत्र सजल हो उठे, अनेक हृदय प्रेमरस से आप्लावित हो गए। ऐसा अनुभव हुआ मानो गंगा की निर्मल तरंगें शब्दस्वरूप धारण कर प्रत्येक मानस-तट का अभिषेक कर रही हों। शिवतत्त्व की इस पूर्वरात्रि में भागवत-वाणी ने आत्मा को उस परमशिव की ओर उन्मुख कर दिया, जो ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के अधिष्ठाता हैं।
इसी भावप्रवण वातावरण में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय सचिव हरेंद्र सिंह ने मीडिया संबोधन में स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि प्रभु-कथा का रसास्वादन साधारण उपलब्धि नहीं, अपितु परमकृपा का प्रसाद है। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में प्रतिपादित किया कि प्रभु की कथा को वस्तुतः प्रभु ही सुनते हैं; वही श्रवण करते हैं और वही अपने भक्तों को माध्यम बनाकर उसका प्रसार करते हैं। मनुष्य केवल निमित्त है, कर्ता तो स्वयं परमात्मा हैं। उनके विनम्र, किंतु दार्शनिक रूप से गहन उद्गारों ने सभा के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक गंभीरता से परिपूर्ण कर दिया।
कथा के मध्य राष्ट्रीय सनातन महासंघ द्वारा कथा व्यास नीतू जी को अंगवस्त्र एवं सुशोभित पुष्पमाला अर्पित कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उस सनातन परंपरा का अभिनंदन था जो शब्दब्रह्म के माध्यम से समाज का आध्यात्मिक संस्कार करती आई है। श्रद्धा से अवनत मस्तक और कृतज्ञता से भरे हृदय उस क्षण को अविस्मरणीय बना रहे थे।
वरिष्ठ भाजपा नेता सर्वेश वाजपेई ने भी श्रद्धापूर्वक प्रणाम निवेदित करते हुए कथा व्यास को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ अर्पित कर सम्मान प्रकट किया। इस सामूहिक श्रद्धाभाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब समाज के विविध आयाम अध्यात्म के प्रति समर्पित होते हैं, तभी धर्म जीवन का वास्तविक आलोक बनता है।
समापन की ओर अग्रसर कथा की अमृतधारा ने प्रत्येक श्रोता के अंतःकरण में यह अमिट सत्य अंकित कर दिया कि गंगा देह का परिष्कार करती है, किंतु श्रीमद्भागवत चेतना का रूपांतरण करती है। महाशिवरात्रि की इस पूर्वरात्रि में कोयलीपुर ने केवल कथा का श्रवण नहीं किया, अपितु शब्दब्रह्म के माध्यम से आत्मा के परिष्कार और प्रभुसान्निध्य की अनुभूति का साक्षात्कार किया—और यही उस रात्रि की वास्तविक दिव्यता थी।
