लखनऊ में पुष्प प्रदर्शनी का गौरवपूर्ण समापन विजेताओं को पारितोषिक वितरण के साथ, सौंदर्य, संस्कृति और संकल्प का समन्वित उत्कर्ष

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।राजधानी लखनऊ की सांस्कृतिक चेतना में नवप्राण-संचार करने वाली ऐतिहासिक पुष्प प्रदर्शनी का समापन अद्वितीय गरिमा, जन-उल्लास और सौंदर्य-साधना के मध्य संपन्न हुआ।

जिस परंपरा का शुभारंभ कभी नगर के सौंदर्यबोध को सार्वजनिक उत्सव में रूपांतरित करने के लिए पद्मश्री डा एस सी राय ने इस उद्देश्य से किया गया था, वही परंपरा इस वर्ष पुनः अपने पूर्ण वैभव के साथ सुषमा खर्कवाल के सकारात्मक प्रयास से साकार हुई।

विविधवर्णी पुष्पों की सुरभित आभा, कलात्मक उद्यान-विन्यास और प्रकृति-संवर्धन के प्रति नागरिकों की अनुपम निष्ठा ने इस आयोजन को एक साधारण प्रदर्शनी से ऊपर उठाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महोत्सव में परिणत कर दिया।

वैश्विक महामारी के कारण वर्षों तक अवरुद्ध रहे इस पुष्पोत्सव की अनुपस्थिति ने नगर के सांस्कृतिक जीवन में जो शून्यता उत्पन्न की थी, वह इस वर्ष पूर्णतः परिपूरित होती दिखाई दी। वर्ष 2026 में महानगर विस्तार जनकल्याण समिति के सचिव एवं राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह तथा महापौर Sushma Kharkwal के समन्वित प्रयासों से पुनर्प्रारंभ हुआ यह आयोजन समापन अवसर पर भी उसी तेजस्विता और सांस्कृतिक आभा से आलोकित रहा।

समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले विजेताओं को विधिवत् परितोषिक एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल प्रतियोगिता की उपलब्धि का संकेत नहीं, अपितु प्रकृति-प्रेम, सृजनशीलता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का सार्वजनिक अभिनंदन था। विजेताओं के मुखमंडल पर प्रस्फुटित संतोष इस तथ्य का द्योतक था कि लखनऊ की धरती पर सौंदर्य और संस्कार का समन्वय आज भी अक्षुण्ण है।

इस अवसर पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने नगर निगम द्वारा संपादित इस महनीय उपक्रम के लिए महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरवकुमार,प्रमुख अपर आयुक्त अरविंद राव,सम्मानित पार्षदगण नूपुर शांखधर , अनुराग मिश्र “अन्नू” गौरवी सांवरिया, मुकेश चौहान समस्त सहभागी जनों के प्रति हार्दिक शुभेच्छाएँ एवं कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब प्रशासनिक दूरदर्शिता और सामाजिक सहभागिता एकसूत्रता में बंधती है, तब परंपराएँ केवल पुनर्जीवित नहीं होतीं, बल्कि नवतेज के साथ प्रखरित होकर भविष्य का मार्ग आलोकित करती हैं।


राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे नागरिकों ने मीडिया से संवाद करते हुए इस प्रदर्शनी को “अद्वितीय” और “अवर्णनीय” की संज्ञा दी। उनके अनुसार यहाँ की सुषमा, विन्यास और प्राकृतिक सौंदर्य की अनुपम छटा का शब्दों में सम्यक् वर्णन संभव नहीं; यह अनुभूति की वस्तु है, अभिव्यक्ति की सीमा से परे।

समापन अवसर पर उपस्थित प्रमुख सहभागी जनों में सदस्यगण, संस्कृतभारती अवधप्रांत , गुलाब सिंह चैयरमैन वारियर्स डिफेंस एकेडमी व कालेज, डा सुशील कुमार अग्रवाल सहित बड़ी संख्या मे
गणमान्य व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस प्रकार पुष्प प्रदर्शनी ने न केवल अपने सौंदर्य-विस्तार से जनमानस को अभिभूत किया, अपितु यह भी सिद्ध कर दिया कि लखनऊ की सांस्कृतिक आत्मा परिस्थितियों से पराजित नहीं होती—वह प्रत्येक विराम के पश्चात् और अधिक प्रखरता के साथ पुनः प्रफुल्लित होती है।

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