
त्रुटियों पर तीव्र असंतोष, अपूर्ण कार्यों के शीघ्र संपादन हेतु कठोर निर्देश

दैनिक इंडिया न्यूज़, मऊ।जनपद मऊ के विकास खंड बड़राव में आज प्रशासनिक सक्रियता का एक सशक्त और अनुकरणीय परिदृश्य देखने को मिला, जब मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव ने समस्त प्रगति-परियोजनाओं का बहुआयामी और सूक्ष्म परीक्षण किया। यह निरीक्षण मात्र औपचारिकता न होकर उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और गुणवत्ता के प्रति प्रशासनिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट उद्घोष सिद्ध हुआ। अधिकारी की सजग दृष्टि ने जहाँ प्रगति की संभावनाओं को परखा, वहीं शिथिलताओं पर कठोर असंतोष भी व्यक्त किया—और यहीं से आरंभ हुई उत्तरदायित्व की वह श्रृंखला, जिसने समस्त तंत्र को सक्रिय कर दिया।
प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, मुजार बुजुर्ग में कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद, खंड आजमगढ़ द्वारा संपादित निर्माण कार्यों का स्थलीय अवलोकन तकनीकी दल की उपस्थिति में किया गया। चहारदीवारी एवं प्रयोगशाला निर्माण की प्रगति का परीक्षण करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने प्रयुक्त ईंटों की गुणवत्ता एवं पलस्तर कार्य की शुद्धता पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने ईंटों की गुणवत्ता की वैज्ञानिक परीक्षणशाला से अनिवार्य जांच कराने तथा निर्माण मानकों में किसी भी प्रकार की शिथिलता को तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए। निर्माणाधीन प्रयोगशाला में आंतरिक विद्युतीकरण प्राक्कलन के अनुरूप न पाए जाने तथा पलस्तर में आवश्यक तरावट के अभाव पर उन्होंने तीव्र रोष प्रकट किया। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों द्वारा समुचित निगरानी न रखने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी गई कि गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
निरीक्षण का क्रम यहीं नहीं थमा। तत्पश्चात विकास खंड कार्यालय का औचक परीक्षण किया गया, जहाँ अभिलेखीय व्यवस्थाओं में अनेक विसंगतियाँ उजागर हुईं। गार्ड फाइल पूर्व निरीक्षण टिप्पणियों के अनुरूप अद्यतन नहीं पाई गई तथा सेवा पुस्तिकाएँ एवं सामान्य भविष्य निधि अभिलेख अपूर्ण अवस्था में मिले। निष्प्रयोज्य वाहन, जर्जर भवन एवं अप्रासंगिक अभिलेखों के नियमानुसार परिसमापन की कार्यवाही लंबित पाई गई, जिस पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को शिकायतों पर सम्यक प्रतिपुष्टि संकलित न करने तथा ग्राम पंचायतों में संपन्न निर्माण कार्यों की पत्रावलियाँ पूर्ण रूप से अभिलेखागार में संरक्षित न रखने पर कड़ी फटकार लगाई गई। यह स्पष्ट कर दिया गया कि प्रशासनिक शिथिलता अब सहन नहीं की जाएगी।
मनरेगा के अंतर्गत नवीन कार्यों के अभाव तथा अपूर्ण परियोजनाओं की लंबित स्थिति पर खंड विकास अधिकारी को समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में अपेक्षित प्रगति न होने पर भी सुधारात्मक रणनीति तत्काल लागू करने को कहा गया। निर्माण संबंधी पत्रावलियों की अपूर्णता पर विशेष चेतावनी देते हुए सभी लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र संपादित कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। स्पष्ट संकेत था—प्रगति अब शब्दों में नहीं, परिणामों में दिखाई देनी चाहिए।
प्रशासनिक निरीक्षण के उपरांत ग्राम पंचायत बसारतपुर में आयोजित चौपाल ने इस दौरे को जनसंवाद की सार्थकता से जोड़ दिया। वहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, जिससे शासन की योजनाएँ सीधे नागरिकों तक पहुँच सकें। छह माह के शिशु का अन्नप्राशन एवं दो गर्भवती महिलाओं की गोद भराई संपन्न कर सामाजिक संवेदनशीलता का सजीव उदाहरण प्रस्तुत किया गया। ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर निस्तारण योग्य प्रकरणों का त्वरित समाधान कराया गया। ग्राम सभा में विविध विकास कार्यों में पाई गई त्रुटियों को तत्काल सुधारने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को प्रदान किए गए।
चौपाल के उपरांत ग्राम में संपादित निर्माण कार्यों का स्थलीय परीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, जिससे योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक सुनिश्चित हो सके। इस व्यापक निरीक्षण ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासनिक सजगता जब उत्तरदायित्व से जुड़ती है, तब विकास केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धरातल पर मूर्त रूप लेता है।
विकास खंड बड़राव का यह निरीक्षण केवल एक प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि सुशासन की सशक्त उद्घोषणा बनकर उभरा—जहाँ गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनसरोकार सर्वोपरि हैं। निस्संदेह, यह पहल जनपद में विकास की गति को नई दिशा प्रदान करेगी और पाठकों के मन में यह विश्वास दृढ़ करेगी कि सजग प्रशासन ही समृद्ध समाज का आधार है।
