नगर पंचायत बनने के सात वर्ष बाद भी अंधकार, गंदगी और खतरे में वार्ड–10

मधुबन की पाती गली बनी प्रशासनिक उदासीनता की जीवंत मिसाल


दैनिक इंडिया न्यूज | मऊ, उत्तर प्रदेश
नगर पंचायत मधुबन को अस्तित्व में आए लगभग सात वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, किंतु वार्ड संख्या–10 (पाती गली) आज भी बुनियादी नागरिक सुविधाओं से वंचित होकर प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। विकास के नाम पर इस वार्ड में केवल घोषणाएँ हुईं, जबकि धरातल पर हालात बद से बदतर होते चले गए हैं।
वार्ड में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थिति यह है कि लगभग 20 से 25 उपभोक्ताओं को कनेक्शन तो दे दिए गए, किंतु विद्युत पोल स्थापित नहीं किए गए। परिणामस्वरूप उपभोक्ता लकड़ी की बल्लियों के सहारे विद्युत तार लटकाने को विवश हैं। इन अस्थायी बल्लियों पर झूलते तार आए दिन वाहनों की चपेट में आकर टूटकर गिरते हैं, जिससे जान-माल की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति किसी भी क्षण जनहानि का कारण बन सकती है।


स्थानीय नागरिकों द्वारा विद्युत विभाग के अधिकारियों एवं वार्ड सभासद को बार-बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें देने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह निष्क्रियता प्रशासनिक संवेदनहीनता और जवाबदेही के अभाव को उजागर करती है।
इसी प्रकार, वार्ड की बजबजाती और जाम नालियाँ नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। सफाईकर्मियों के मनमाने रवैये के कारण नालियों की वर्षों से सफाई नहीं हुई, जिससे उठती दुर्गंध संक्रामक रोगों को खुला निमंत्रण दे रही है। डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।


वार्ड की सड़कों की स्थिति भी दयनीय है। जिला पंचायत द्वारा वर्षों पूर्व लगाए गए इंटरलॉकिंग ईंटें जगह-जगह से टूट चुकी हैं, जिससे राहगीरों, बुजुर्गों और बच्चों को आए दिन गिरने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। यह वार्ड न तो नगर पंचायत की प्राथमिकता में है और न ही विकास योजनाओं की सूची में।


चौंकाने वाली बात यह है कि नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा को इस गंभीर समस्या से अवगत कराए जाने के बावजूद भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
वार्ड निवासी गांधी पाण्डेय, सुभाष, सतीश मल्ल, विक्की जायसवाल, नर्वदेश्वर सिंह, अभिमन्यु, घूरा प्रसाद, मुन्ना, ओमप्रकाश, गंगाधारी गुप्ता, रूपचंद मद्धेशिया, कमलेश मद्धेशिया, बृजमोहन यादव, बीरेंद्र गुप्ता, अशोक सहित अन्य लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही विद्युत पोल स्थापना, नाली सफाई एवं सड़क मरम्मत जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित विभागों एवं नगर पंचायत प्रशासन की होगी।


यह वार्ड आज सवाल पूछ रहा है—
क्या नगर पंचायत का दर्जा केवल कागज़ों तक सीमित है?
क्या विकास केवल मुख्य बाजारों तक ही सिमट कर रह गया है?


और क्या आम नागरिक की सुरक्षा व स्वास्थ्य की कोई कीमत नहीं?


अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है या किसी दुर्घटना के बाद ही उसकी नींद टूटती है।

Share it via Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *