
“संघ गंगा के तीन भागीरथ” नाट्य मंचन से राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक चेतना का जागरण

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर आयोजित संघ शताब्दी वर्ष के सांस्कृतिक आयोजनों की अखंड श्रृंखला में संस्कार भारती, अवध प्रांत द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन “संघ गंगा के तीन भागीरथ” का भव्य, वैचारिक एवं आध्यात्मिक रूप से प्रेरक आयोजन दिनांक 29 दिसंबर 2025, सोमवार, सायंकाल 5:30 बजे, कलामंडलम प्रेक्षागृह, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह नाट्य प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रही, बल्कि राष्ट्रधर्म, सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और तपस्वी जीवन-मूल्यों का जीवंत घोष बनकर सामने आई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण सभागार को राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक आलोक से अनुप्राणित कर दिया। दीप प्रज्वलन का कार्य स्वांत रंजन (अखिल भारतीय संपर्क अधिकारी, संस्कार भारती), उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, अभिजीत गोखले (अखिल भारतीय संगठन मंत्री, संस्कार भारती), प्रो. माण्डवी सिंह (कुलपति, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय), विधायक ओमप्रकाश श्रीवास्तव, अनुराधा गोयल (प्रांत अध्यक्ष), देवेंद्र त्रिपाठी (क्षेत्र प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश) तथा गिरीश चंद्र मिश्र (अखिल भारतीय सदस्य) सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस क्षण में ऐसा प्रतीत हुआ मानो दीपों के साथ-साथ राष्ट्रबोध, संस्कृति और आत्मगौरव की चेतना भी प्रज्वलित हो उठी हो।

नाट्य मंचन “संघ गंगा के तीन भागीरथ” के माध्यम से भारतीय संस्कृति की अक्षुण्ण परंपरा, संघ की वैचारिक साधना तथा समाज-निर्माण में समर्पित तपस्वी महापुरुषों के त्याग, अनुशासन और दीर्घदृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली रंगमंचीय भाषा में अभिव्यक्त किया गया। यह प्रस्तुति किसी ऐतिहासिक आख्यान का मात्र मंचन नहीं थी, बल्कि वह सतत वैचारिक प्रवाह था, जिसने यह प्रतिपादित किया कि संघ एक संगठन भर नहीं, अपितु राष्ट्र की आत्मा से उद्भूत वह चेतना है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता के संस्कारों का संवहन करती आई है।
सशक्त अभिनय, विचारोत्तेजक संवाद, संतुलित मंच संयोजन और भावप्रवण संगीत ने प्रस्तुति को गहन प्रभावशीलता प्रदान की। प्रत्येक दृश्य के साथ दर्शक केवल द्रष्टा नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रचेतना के सक्रिय सहभागी बनते चले गए। सभागार में उपस्थित प्रबुद्धजन, कला-संस्कृति प्रेमी, विद्यार्थी और नागरिक समाज नाट्य की वैचारिक ऊष्मा से भावविभोर दिखाई दिए।
इस अवसर पर स्वांत रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ध्येय समरस, सुसंस्कृत और आत्मगौरव से युक्त समाज का निर्माण करते हुए राष्ट्र को परम वैभव की दिशा में अग्रसर करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नाट्य प्रस्तुति संघ की वैचारिक दृष्टि और सांस्कृतिक साधना को जनमानस तक पहुँचाने में एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगी।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संस्कार भारती, अवध प्रांत एवं राधिका क्रिएशन्स को इस वैचारिक-सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और राष्ट्रनिर्माण की चेतना को सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय संविधान के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष चित्र प्रदर्शनी ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। संविधान में अंकित चित्रों के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने विचार और विवेक दोनों को समान रूप से स्पर्श किया।
कार्यक्रम समापन के पश्चात मंचीय कला संयोजिका विभा सिंह ने संस्कार भारती की ओर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं वैचारिक संरक्षक अजय दीप सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे दूरदर्शी अभिभावकों और संरक्षकों के मार्गदर्शन से प्रदेश और राष्ट्र की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने अजय दीप सिंह को वैचारिक दृढ़ता, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और प्रशासनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के जीवंत प्रतीक के रूप में निरूपित किया।
इसी क्रम में विभा सिंह ने स्वांत रंजन के व्यक्तित्व और कृतित्व का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संगठनात्मक कौशल, सांस्कृतिक दृष्टि और निःस्वार्थ समर्पण संस्कार भारती की वैचारिक साधना की आधारशिला है, जिसके माध्यम से यह संगठन राष्ट्रव्यापी चेतना का स्वरूप ग्रहण कर रहा है।
कार्यक्रम संपन्न होने के पश्चात मीडिया से संवाद करते हुए मंचीय कला संयोजिका ने कलाकारों, मंचीय तकनीकी दल, आयोजन समिति तथा पर्दे के पीछे कार्यरत समर्पित कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से, बिना किसी यश-आकांक्षा के कार्य करने वाले ये कार्यकर्ता ही इस आयोजन की वास्तविक शक्ति हैं। यही संस्कार भारती की वह कार्यसंस्कृति है, जहाँ नेतृत्व मार्गदर्शन करता है और कार्यकर्ता साधना करता है।
इस अवसर पर संस्कार भारती, अवध प्रांत के संगठनात्मक दायित्वों का प्रतिनिधित्व करते हुए सीताराम कश्यप (कार्यकारी प्रांत अध्यक्ष), अमित कुमार (प्रांत महामंत्री), बृजेंद्र स्वरूप निगम (प्रांत कोषाध्यक्ष), शिव कुमार व्यास (प्रांत उपाध्यक्ष), धर्मेंद्र सिंह (प्रांत मंत्री), पुनीत स्वर्णकार (प्रांत मंत्री), किरण श्रीवास्तव (मातृशक्ति संयोजिका), डॉ. पवन तिवारी (संयोजक, मंचीय कला, अवध प्रांत) एवं विभा सिंह (मंचीय कला संयोजिका) सहित अनेक पदाधिकारी, विधा संयोजक, विशेष आमंत्रित सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का गरिमामय एवं प्रभावी संचालन अटल नारायण द्वारा किया गया।
