जीव का वास्तविक स्वरूप: आत्म बोध का महत्व-कृष्णाचार्य

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ के कृष्णाचार्य जी महाराज ने आत्म बोध और जीवन के वास्तविक स्वरूप पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव को यह विचार करना चाहिए कि वह कौन है, उसकी क्या शक्ति है, और उसका क्या कर्तव्य है। आत्मबोध से ही जीवन की जटिलताओं का समाधान संभव है।

उन्होंने बताया कि जीव, सच्चे अर्थों में, ईश्वर का ही स्वरूप है। लेकिन भ्रमित विचारों के कारण वह अच्छे-बुरे का भेद करता है और अपने भीतर छिपे अमूल्य खजाने को पहचान नहीं पाता। आत्म ज्ञान होने पर जीव समझता है कि वह जन्म और मृत्यु के बंधनों से परे है।

आचार्य जी ने कहा, “जब जीव को आत्म स्वरूप का बोध होता है, तब उसे कोई कष्ट नहीं रहता। वह समझता है कि वह न शरीर है, न मन, और न ही शोक-मोह का भागी। आत्मबोध से प्रकृति का साक्षात्कार होता है और यह प्रकृति ही परमात्मा का दर्शन है।”

आचार्य जी ने यह संदेश दिया कि प्रत्येक जीव को आत्मबोध से अपने अस्तित्व का सही ज्ञान प्राप्त कर प्रभु के स्वरूप का चिंतन करना चाहिए। यही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

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