सनातन चेतना, संगठन और संस्कार का संगम : आत्मीय संवाद में दिखा समाज-निर्माण की रूपरेखा

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ ।राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने संगठनात्मक उत्तरदायित्वों के निर्वहन और सामाजिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विश्व हिंदू परिषद के प्रन्यासी, सरल स्वभाव एवं आत्मीयता के धनी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजय दीप सिंह के आवास पर शिष्टाचार भेंट की। यह भेंट केवल औपचारिक नहीं रही, बल्कि सनातन मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और भावी पीढ़ी के संस्कार निर्माण को लेकर एक सारगर्भित संवाद का सशक्त माध्यम बनी।

इस अवसर पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजय दीप सिंह को राष्ट्रीय सनातन महासंघ के संरक्षक के रूप में दायित्व ग्रहण करने हेतु आमंत्रित किया। साथ ही उन्होंने अपनी पौत्री के जन्मोत्सव में सहभागी होने का आत्मीय निमंत्रण भी प्रदान किया। यह आमंत्रण केवल पारिवारिक प्रसंग तक सीमित न होकर भावी पीढ़ी को संस्कारवान वातावरण प्रदान करने के संकल्प का प्रतीक भी रहा।

दोनों प्रबुद्ध व्यक्तित्वों के मध्य यह प्रथम औपचारिक भेंट होते हुए भी आत्मीयता, वैचारिक सामंजस्य और संत-स्वभाव की गरिमा से परिपूर्ण रही। संवाद के दौरान समाज को सुदृढ़ करने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने तथा सनातन सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस आत्मीय संवाद से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ कि ऐसे मूल्यनिष्ठ, अनुभवी और लोककल्याण के प्रति प्रतिबद्ध मार्गदर्शकों के संरक्षण से संगठन को वैचारिक दृढ़ता और नैतिक संबल प्राप्त होगा।

जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस अवसर पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे करुणाशील, भगवत-भाव से ओतप्रोत और समाज के प्रति समर्पित महान व्यक्ति से सान्निध्य प्राप्त होना स्वयं में सौभाग्य का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अजय दीप सिंह जैसे अनुभवी और दूरदर्शी व्यक्तित्व के मार्गदर्शन से राष्ट्रीय सनातन महासंघ समाज के युवाओं को प्रगति, सेवा और संस्कार के पथ पर अग्रसर करने में और अधिक सक्षम सिद्ध होगा।
यह भेंट केवल दो व्यक्तित्वों का मिलन नहीं थी, बल्कि संगठन, संस्कार और सेवा के त्रिसूत्र पर आधारित सामाजिक नवचेतना की दिशा में एक प्रेरणास्पद पहल के रूप में भी देखी जा रही है—जो यह संकेत देती है कि जब अनुभव, संवेदना और संकल्प एक साथ आते हैं, तब समाज को नई दिशा और स्थायी आधार प्राप्त होता है।

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