
स्वामी विवेकानंद की चेतना से राष्ट्र निर्माण का संकल्प
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 11 जनवरी 2026 जब राष्ट्र के इतिहास में आत्मचिंतन का क्षण आता है, तब युवा शक्ति ही परिवर्तन की मशाल बनती है। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित राष्ट्रीय युवा चेतना दिवस के अवसर पर ‘आह्वान–द कॉल टू यूथ’ विषयक कार्यशाला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के युवाओं को राष्ट्र संचालन के लिए तैयार करने का वैचारिक उद्घोष सिद्ध हुई। ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार तथा Divine India Youth Association (DIYA), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम गायत्री शक्तिपीठ, गोमती नगर में राष्ट्रवादी चेतना का जीवंत केंद्र बन गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुए इस वैचारिक महायज्ञ में उत्तर जोन अयोध्या के समन्वयक श्री देशबंधु तिवारी ने ओजस्वी उद्बोधन देते हुए कहा—
“भारत को फिर से विश्वगुरु बनना है तो यह कार्य घोषणाओं से नहीं, युवाओं के चरित्र, अनुशासन और त्याग से सिद्ध होगा।”

उन्होंने वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा के समन्वय को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि दिशाहीन युवा राष्ट्र की शक्ति नहीं बन सकता।
इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रति कुलपति आदरणीय चिन्मय पंड्या जी का संदेश युवाओं के लिए पाथेय सिद्ध हुआ। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश केवल भाषण नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए जीने-मरने का संकल्प है। “उठो, जागो और राष्ट्र के लिए स्वयं को होम दो”—यह उद्घोष आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
कार्यशाला के विचार सत्रों में योगाचार्य रजनीश तिवारी ने मन की शक्ति को राष्ट्र सेवा का प्रथम साधन बताते हुए कहा कि आत्मसंयम और मानसिक दृढ़ता के बिना कोई भी महान लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।
श्री शतरुद्र प्रताप सिंह, नेशनल कन्वीनर यूथ इन एक्शन ने नैतिक मूल्यों को राष्ट्र की रीढ़ बताते हुए चेताया कि नैतिकता से विहीन युवा केवल संख्या है, शक्ति नहीं।
श्री गौरव वार्ष्णेय, जॉइंट डायरेक्टर, उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को लक्ष्यबद्ध जीवन, पुरुषार्थ और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
प्रश्नोत्तरी सत्र में डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें व्यवहारिक राष्ट्रसेवा के मार्ग दिखाए।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वशिष्ठ बाल संस्कार शाला के बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत दहेज विरोधी एवं द लॉस्ट जेनरेशन नाटिकाओं ने सामाजिक विकृतियों पर करारा प्रहार किया। सामूहिक योग प्रदर्शन तथा प्रज्ञागीतों—
“आओ सपूतों भारत की तक़दीर बना दो” और “हमारा है यह दृढ़ संकल्प नया संसार बसायेंगे”—
ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। प्रेरक युवाओं का सम्मान राष्ट्र सेवा के प्रति उनके समर्पण की सार्वजनिक स्वीकृति बना।
कार्यक्रम की सफलता में DIYA लखनऊ टीम के समर्पित कार्यकर्ताओं—निधि वर्मा, निकेत सिंह, अनुपम मौर्य, अनुज कुमार वर्मा, ज्योति सिंह, हेमंत, प्रशांत शुक्ला, दिलीप श्रीवास्तव, आकाश वर्मा, रजत, सूरज राय, शशिभूषण पाण्डेय एवं इंद्रेश मिश्रा—का योगदान अविस्मरणीय रहा।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम्, राष्ट्र सेवा के संकल्प और शांतिपाठ के साथ हुआ। यह आयोजन एक स्पष्ट संदेश छोड़ गया—
भारत का भविष्य सुरक्षित है, क्योंकि उसकी युवा चेतना जाग्रत हो रही है।
