
ध्रुपद गायन संग पखावज, विचित्र वीणा और सुरबहार की गूंज से सजेगी सांस्कृतिक संध्या
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम और गम्भीर परंपरा ध्रुपद को समर्पित एक गरिमामय आयोजन आगामी 19 एवं 20 जनवरी को पावन नगरी अयोध्या में आयोजित किया जा रहा है। यह दो दिवसीय ध्रुपद समारोह उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा अयोध्या स्थित प्रमोदवन में श्री हनुमत विश्वकला संगीत आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन विश्वविख्यात ध्रुपदाचार्य एवं सुप्रसिद्ध पखावज वादक डॉ. राम शंकर दास (स्वामी पागल दास) की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी स्मृति को समर्पित रहेगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के दूरदर्शी निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में लुप्तप्राय शास्त्रीय वाद्य परंपराओं के संरक्षण तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत को जन–जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निरंतर सांस्कृतिक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन्हीं सांस्कृतिक प्रयासों की श्रृंखला में उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन में यह विशिष्ट आयोजन संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह तथा निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर के निर्देशन में किया जा रहा है।
समारोह की प्रथम संध्या (19 जनवरी) को कार्यक्रम का शुभारंभ अयोध्या के विजय राम दास, अनुभव राम दास एवं कौशिकी झा द्वारा सशक्त एवं गूढ़ पखावज वादन से होगा। इसके उपरांत प्रयागराज के प्रशान्त निशान्त मलिक द्वारा शास्त्रीय गंभीरता से ओत–प्रोत ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया जाएगा। प्रथम दिवस की तृतीय कड़ी में कन्नौज के कृष्ण चन्द्र गुप्ता द्वारा दुर्लभ एवं अत्यंत मार्मिक विचित्र वीणा वादन श्रोताओं को भारतीय संगीत की गहन साधना से साक्षात्कार कराएगा।
समारोह की द्वितीय संध्या (20 जनवरी) को अयोध्या के वैभव राम दास, प्राप्ति निंगले, वैभव निंगले तथा देव प्रकाश दुबे के सामूहिक पखावज वादन से कार्यक्रम का प्रारंभ होगा। इसके पश्चात दिल्ली के बृजभूषण गोस्वामी द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को रसानुभूति से सराबोर करेगा। समापन प्रस्तुति के रूप में जयपुर के अश्विन दलवी द्वारा प्रस्तुत सुरबहार वादन समारोह को संगीतात्मक ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
यह भव्य सांस्कृतिक आयोजन प्रतिदिन सायं 5 बजे से अयोध्या के प्रमोदवन स्थित श्री हनुमत विश्वकला संगीत आश्रम परिसर में आयोजित होगा। ध्रुपद की गंभीर साधना, वाद्य–संगीत की प्राचीन परंपराएँ और दिव्य वातावरण—यह समारोह न केवल संगीत साधकों, बल्कि समस्त सांस्कृतिक चेतना से जुड़े जनमानस के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा।
