जितेंद्र प्रताप सिंह ने पहल को बताया महिला आर्थिक सशक्तिकरण का अनुकरणीय प्रतिमान; राकेश पठानिया के प्रयासों की महामहिम ने की सराहना।


दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली/मलकवाल (हिमाचल प्रदेश), 31 अक्टूबर 2026। महिला सशक्तिकरण को केवल विचार और संकल्प तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक स्वाधीनता, स्वरोजगार और उद्यमशीलता के धरातल पर साकार करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश के मलकवाल में एक अभिनव पहल का शुभारंभ हुआ। हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री कविन्द्र गुप्ता ने पूर्व वन मंत्री श्री राकेश पठानिया द्वारा संचालित महिला संगठन के माध्यम से विकसित जैविक मशरूम उत्पादन परियोजना का विधिवत उद्घाटन किया। इस विशिष्ट अवसर पर संस्कृतभारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री जितेंद्र प्रताप सिंह की गरिमामयी सहभागिता भी रही। यह आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विकसित उस अवधारणा का परिचायक बना, जिसमें स्थानीय संसाधनों, वैज्ञानिक कृषि पद्धति और संगठित महिला सहभागिता को आर्थिक परिवर्तन का आधार बनाया गया है।

इस पहल की वास्तविक विशिष्टता इसके पीछे निहित उस आर्थिक प्रतिमान में दिखाई देती है, जिसने महिलाओं को केवल रोजगार की आकांक्षी नहीं, बल्कि स्वयं आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय सहभागी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। पूर्व वन मंत्री श्री राकेश पठानिया ने महामहिम राज्यपाल को परियोजना की विस्तृत कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए बताया कि इस गतिविधि से जुड़ी महिलाएँ प्रतिदिन लगभग 1,200 से 2,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं तथा करीब 300 महिलाएँ इस स्वरोजगार अभियान का हिस्सा बन चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करते हुए विकसित यह मॉडल महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की संभावनाएँ भी प्रस्तुत करता है।
हालाँकि इस परियोजना का महत्त्व केवल महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पक्ष मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धति, गुणवत्ता संरक्षण और व्यावसायिक आपूर्ति की सुव्यवस्थित व्यवस्था है। आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यहाँ मशरूम का उत्पादन रासायनिक पदार्थों एवं हानिकारक तत्वों के उपयोग के बिना किया जा रहा है। उत्पादित मशरूम को वैज्ञानिक विधियों से संरक्षित करने तथा नियंत्रित तापमान के माध्यम से उसकी गुणवत्ता और उपयोग अवधि बनाए रखने की व्यवस्था विकसित की गई है। इसके उत्पादों की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश के साथ देश के विभिन्न हिस्सों तक किए जाने का प्रयास है। उत्पादन से लेकर संरक्षण और विपणन तक की यह समन्वित प्रक्रिया महिला उद्यमिता को एक व्यापक व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।
इस अभिनव प्रयास की सामाजिक उपयोगिता और दूरगामी संभावनाओं को रेखांकित करते हुए महामहिम राज्यपाल श्री कविन्द्र गुप्ता ने परियोजना की सराहना की। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण एवं उनके आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बताते हुए श्री राकेश पठानिया को बधाई दी तथा संस्थान के विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। राज्यपाल का यह प्रोत्साहन इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि जब महिलाओं को अपनी प्रतिभा, श्रम और कौशल के माध्यम से आर्थिक रूप से सक्षम बनने का अवसर मिलता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से आगे बढ़कर परिवार, समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुँचता है।
कार्यक्रम में उपस्थित संस्कृतभारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी इस पहल के उद्देश्यों और सामाजिक महत्त्व की सराहना करते हुए इसे महिला स्वावलंबन का अनुकरणीय प्रतिमान बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास महिलाओं के जीवन में आर्थिक परिवर्तन के साथ आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने की नई ऊर्जा का संचार करते हैं। उनके अनुसार, किसी महिला को अपने परिश्रम और कौशल के माध्यम से नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिलना केवल उसकी आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। ऐसी पहलें महिलाओं को अपनी क्षमताओं का विस्तार करने और परिवार की आर्थिक प्रगति में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती हैं।
श्री सिंह ने परियोजना के वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पक्ष पर विशेष बल देते हुए विकसित मशरूम प्रजाति के उत्पादन, उसके संरक्षण, नियंत्रित तापमान में विस्तारित उपयोग अवधि सुनिश्चित करने तथा सफल व्यावसायीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण उत्पाद को आमजन तक उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने और स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के इस समन्वित प्रयास को कृषि विज्ञान, उद्यमशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का सार्थक संगम बताया। इस अवसर पर उन्होंने श्री राकेश पठानिया, अध्यक्ष वी.वी.एम. इंस्टीट्यूशन, को इस दूरदर्शी पहल के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए विकसित मशरूम प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सफल व्यावसायीकरण की कामना की। साथ ही इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किए जाने पर उन्होंने आभार भी व्यक्त किया।
मलकवाल में प्रारंभ हुई यह पहल इस व्यापक संभावना को सामने लाती है कि ग्रामीण भारत की आर्थिक उन्नति का सशक्त आधार स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, महिला उद्यमिता का विस्तार और स्वरोजगार के स्थायी अवसरों का सृजन हो सकता है। महामहिम राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रोत्साहन, पूर्व वन मंत्री श्री राकेश पठानिया के नेतृत्व में संचालित प्रयास और श्री जितेंद्र प्रताप सिंह की सकारात्मक सहभागिता ने इस आयोजन को विशिष्ट महत्त्व प्रदान किया। यदि इस प्रकार के प्रयासों को तकनीकी सहयोग, गुणवत्ता मानकों और प्रभावी विपणन व्यवस्था के साथ निरंतर विस्तार मिलता है, तो यह परियोजना महिला आर्थिक स्वाधीनता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित होने की उल्लेखनीय क्षमता रखती है।