प्रयागराज में दो दिवसीय महाविद्यालय कार्य-अभ्यास वर्ग में 30 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण; जयप्रकाश गौतम ने युवाशक्ति को संस्कृत के प्रचार-प्रसार का प्रमुख आधार बताया

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।
संस्कृत को महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के परिसर से निकालकर युवाओं के दैनिक जीवन तथा सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की रणनीति के साथ संस्कृतभारती ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार और कार्यकर्ता प्रशिक्षण पर जोर दिया है। इसी उद्देश्य से प्रयागराज के अरैल स्थित पूज्य सच्चा बाबा आश्रम में 1 और 2 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय महाविद्यालय कार्य-अभ्यास वर्ग आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्र के विभिन्न महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से आए लगभग 30 चयनित प्रतिभागियों ने सहभागिता की। वर्ग का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था कि संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार की सबसे बड़ी संभावना देश की युवा पीढ़ी में निहित है।

संस्कृतभारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयप्रकाश गौतम ने अपने संबोधन में कहा, “वर्तमान समय में संस्कृत के प्रचार का मुख्य स्रोत देश के युवा हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन तक सीमित न रहते हुए उसे अपने जीवन और व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी यदि संस्कृत को अपनी जीवनशैली का अंग बनाते हैं, तो इससे समाज में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई धारा विकसित हो सकती है। उन्होंने आधुनिक युग में संस्कृत की भाषावैज्ञानिक और ज्ञानपरंपरागत प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला।

दो दिवसीय अभ्यास वर्ग को आठ बौद्धिक, व्यावहारिक और संगठनात्मक सत्रों में विभाजित किया गया था। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को संस्कृत के प्रचार की पद्धतियों से परिचित कराने के साथ उनके भाषायी कौशल, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक संपर्क को सुदृढ़ करना था। आयोजन में संस्कृतनिष्ठ युवाओं, शोधार्थियों और कार्यकर्ताओं को इस दिशा में प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया गया कि वे अपने-अपने शिक्षण संस्थानों में संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रभावी पहल कर सकें।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण, ध्येय मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सच्चा बाबा आश्रम के महंत डॉ. चंद्रदेव मिश्र ने आशीर्वचन देते हुए संस्कृत भाषा की साधना और आश्रम की आध्यात्मिक परंपरा के संबंध को रेखांकित किया। संस्कृतभारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संगठनमंत्री प्रमोद पंडित ने अभ्यास वर्ग की रूपरेखा, उद्देश्यों और महाविद्यालयों में संगठनात्मक गतिविधियों की आवश्यकता पर विचार रखे। काशी प्रांत के सहमंत्री डॉ. शालिग्राम त्रिपाठी ने प्रतिभागियों का परिचय कराया। इस अवसर पर संस्कृतभारती के विद्यार्थी विस्तारक विवेक सिंह सहित क्षेत्र के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रमोद पंडित ने विभिन्न सत्रों में संगठन विस्तार, भारतीय ज्ञानपरंपरा की निरंतरता और कार्यकर्ताओं के निस्वार्थ समर्पण के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कार्यकर्ताओं का आचरण, निष्ठा और व्यवहार समाज में संस्कृत के प्रति विश्वास एवं रुचि उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, डॉ. शालिग्राम त्रिपाठी ने संस्कृत के शुद्ध उच्चारण, व्याकरणगत विशेषताओं और भाषायी अनुशासन पर मार्गदर्शन दिया। प्रयागराज महानगर के प्रशिक्षण प्रमुख अंकित मिश्र ने सरल मानक संस्कृत के व्यावहारिक प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक और कार्यकर्ता भाषा को सहज रूप में जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समापन सत्र में जयप्रकाश गौतम ने प्रतिभागियों को अपने-अपने महाविद्यालयों में संस्कृत संभाषण शिविर आयोजित करने, नियमित स्वाध्याय करने और अधिकाधिक युवाओं को संस्कृत के कार्य से जोड़ने का संकल्प दिलाया। समापन अवसर पर प्रमोद पंडित, डॉ. शालिग्राम त्रिपाठी, काशी प्रांत के प्रचार प्रमुख राम पांडेय, अंकित मिश्र, विवेक सिंह सहित स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कल्याण मंत्र के साथ अभ्यास वर्ग संपन्न हुआ।
अभ्यास वर्ग का व्यापक उद्देश्य स्पष्ट है—संस्कृत के प्रचार को संस्थागत गतिविधि से आगे बढ़ाकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी से जोड़ना। अब इस प्रशिक्षण के परिणाम संबंधित महाविद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और विद्यार्थियों के बीच विकसित होने वाली संस्कृत गतिविधियों के माध्यम से सामने आएंगे।