विधानसभा सेवा नियमावली से जुड़े 2011 के मामले में काउंटर हलफनामा दाखिल करने की समय-सीमा तय; 29 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय की सेवा नियमावली से जुड़े रिट-ए संख्या 1375/2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य को काउंटर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह और उससे अधिक समय नहीं दिया है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने 25 सितंबर 2026 के आदेश में मामले को 29 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। वर्ष 2011 में दाखिल यह याचिका अब अपने 15वें वर्ष में पहुंच चुकी है और अदालत के ताजा आदेश ने लंबे समय से लंबित जवाब की प्रक्रिया को निर्णायक चरण में ला दिया है।
मामला तेजेंद्र सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, मुख्य सचिव एवं अन्य का है। आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता को काउंटर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है और इसके आगे कोई समय नहीं दिया जाएगा। यही न्यायालयी टिप्पणी इस मामले की वर्तमान स्थिति को सबसे महत्वपूर्ण बनाती है।
याचिका का संबंध विधानसभा सचिवालय की सेवा नियमावली में कथित संशोधन और उससे जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया से है। ऐसे में अब राज्य की ओर से दाखिल होने वाला काउंटर हलफनामा इस प्रकरण के तथ्यात्मक और विधिक पक्ष को समझने में महत्वपूर्ण होगा। नियमावली में संशोधन किस प्रक्रिया से हुआ और उससे संबंधित नियुक्तियों का वैधानिक आधार क्या रहा—इन प्रश्नों पर अब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने वाले अभिलेखों की भूमिका अहम होगी।
मामले में प्रदीप कुमार दुबे की भूमिका और प्रभाव को लेकर सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इन आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक सक्षम न्यायालय अथवा अधिकृत जांच से उनका निर्धारण न हो। फिलहाल न्यायालय के आदेश का केंद्र राज्य की ओर से काउंटर हलफनामा दाखिल किया जाना है।
अब निगाह 29 अक्टूबर 2026 की सुनवाई पर है। वर्षों से लंबित इस याचिका में राज्य का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमावली संशोधन और उससे संबंधित प्रक्रिया पर सरकार न्यायालय के समक्ष क्या तथ्य और विधिक आधार रखती है।