उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के साथ मां सरयू की आरती कर मुख्यमंत्री ने की सुख, शांति और समृद्धि की कामना; दीपावली पर जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां बांटने, स्थानीय कारीगरों को संबल देने और श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का प्रदेशवासियों से किया आह्वान।

दैनिक इंडिया न्यूज़, अयोध्या/ लखनऊ।श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में दीपों की अविरल आभा, मां सरयू के तट पर भक्ति का दिव्य वातावरण और श्रद्धा से अभिभूत जनमानस के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव-2026 के अवसर पर आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के साथ मां सरयू की आरती कर उन्होंने प्रत्येक जीवन में सुख, शांति और सद्भाव के निरंतर प्रवाह तथा सर्वत्र समृद्धि एवं मंगल की कामना की। वहीं, दीपावली के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की कि पर्व का वास्तविक प्रकाश केवल अपने घरों तक सीमित न रखें, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचाएं।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या की आध्यात्मिक महत्ता को रामचरितमानस की चौपाई— 'जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि॥' के माध्यम से अभिव्यक्त करते हुए मां सरयू की आरती को अपना परम सौभाग्य बताया। उन्होंने मां सरयू की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव बने रहने की प्रार्थना की। दीपोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या की सनातन सांस्कृतिक परंपरा, जनआस्था और आध्यात्मिक विरासत की व्यापक छवि प्रस्तुत की।

दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व सनातन संस्कृति की आस्था, आध्यात्मिक चेतना और लोकमंगल की भावना का प्रतीक है। अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की विजय का संदेश देने वाला यह महापर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के उपरांत अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की प्राचीन दीपावली परंपरा को दीपोत्सव के माध्यम से नई भव्यता और वैश्विक पहचान मिली है। यह आयोजन भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने दीपावली के सामाजिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि पर्व की खुशियां तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद परिवारों की सहायता करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि आर्थिक अभाव के कारण किसी घर में दीपावली का उल्लास फीका न पड़े।

उन्होंने स्थानीय उत्पादों की खरीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। मिट्टी के दीपक, बाती और पारंपरिक हस्तशिल्प खरीदकर माटी कला से जुड़े शिल्पकारों, स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक संबल देने की अपील की। मुख्यमंत्री के संदेश में दीपावली को सांस्कृतिक उत्सव के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता और स्थानीय आजीविका को मजबूती देने वाले अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी पर्व की अनिवार्य जिम्मेदारी बताते हुए घर, गली और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। उन्होंने प्रदेशवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारने तथा परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की अपील की।

मुख्यमंत्री की कामना है कि दीपोत्सव और दीपावली का यह पावन पर्व प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, समृद्धि और नई आशाओं का संचार करे। मां सरयू की कृपा से समाज में सद्भाव और आत्मीयता बनी रहे तथा उत्तर प्रदेश शांति, सांस्कृतिक गौरव और विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे।