गोमती के बढ़ते जलस्तर और जलनिकासी की विफलता से हजारों परिवारों के प्रभावित होने के बाद स्थायी समाधान की दिशा में बड़े फैसले; आईआईएम रोड से पक्के पुल तक तटबंध, न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक विस्तृत जलनिकासी नेटवर्क और गोमती में गाद निकालने की योजना। फैजुल्लागंज में 6,500 घरों पर बाढ़ की मार, 38 हजार से अधिक आबादी प्रभावित।
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।
लखनऊ के फैजुल्लागंज में अतिवृष्टि और गोमती नदी के उफान से पैदा हुए जलभराव की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब तात्कालिक राहत से आगे बढ़कर स्थायी संरचनात्मक समाधान की दिशा में कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय रक्षामंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठक में आईआईएम रोड से पक्के पुल तक गोमती नदी के बाएं तट पर लगभग 5.5 किलोमीटर लंबे तटबंध के निर्माण, 12 नए पंपिंग स्टेशन स्थापित करने तथा न्याय विहार से एल्डिको ड्रेन तक विस्तृत जलनिकासी नेटवर्क विकसित करने का निर्णय लिया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नदी का जलस्तर बढ़ने और अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में भी रिहायशी बस्तियों में पानी भरने की समस्या को नियंत्रित करना है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और समन्वित जलनिकासी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
सिंचाई, नगर विकास, आवास, स्वास्थ्य, राजस्व और ऊर्जा विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों और दीर्घकालिक विकास योजनाओं की समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा और महापौर सुषमा खर्कवाल भी बैठक में उपस्थित रहीं। राजनाथ सिंह ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से किए गए राहत प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि फैजुल्लागंज सहित गोमती के आसपास बसे निचले इलाकों को बार-बार होने वाली इस आपदा से स्थायी राहत दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बीते दो सप्ताह में बाढ़ और जलभराव ने फैजुल्लागंज की अनेक बस्तियों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। घरों और प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, आवागमन बाधित हुआ और हजारों परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बैठक में आईआईएम रोड से खदरा होते हुए पक्के पुल यानी हार्डिंग ब्रिज तक तटबंध निर्माण का काम सर्वोच्च प्राथमिकता पर शीघ्र शुरू कराने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही कॉलोनियों में ट्रंक ड्रेनेज, सीवेज नेटवर्क, घर-घर नल से जलापूर्ति, सड़कों के सुदृढ़ीकरण और विद्युत व्यवस्था के विस्तार को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की गई। स्पष्ट है कि समस्या का समाधान केवल नदी के किनारे सुरक्षा दीवार खड़ी करने से नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जलनिकासी और आधारभूत सुविधाओं को एक साथ दुरुस्त करने से ही संभव होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने में कोई कमी न रहे। स्वच्छ पेयजल, भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था निरंतर बनाए रखी जाए तथा जलभराव से क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल मजबूत किया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने फैजुल्लागंज के समग्र विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा उपलब्ध कराने वाले नए समन्वित शैक्षणिक संस्थान की स्थापना, जलभराव प्रभावित क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रूप में उच्चीकृत करने और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी क्षमता का नया सब-स्टेशन स्थापित करने के निर्देश भी दिए।
जलनिकासी की चुनौती को देखते हुए बैठक में पंपिंग स्टेशनों, नालों और तटबंध को एक-दूसरे के पूरक के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से विस्तार करते लखनऊ महानगर में जलनिकासी का ढांचा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा, ताकि अत्यधिक वर्षा अथवा गोमती का जलस्तर बढ़ने पर बस्तियों में पानी न ठहरे। उन्होंने गोमती के अविरल और निर्मल प्रवाह को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा नदी में ड्रेजिंग यानी गाद निकालने की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत भी बताई। इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नदी, नालों और पंपिंग व्यवस्था के बीच जलप्रवाह का वैज्ञानिक आकलन किस तरह किया जाता है।
विधायक डॉ. नीरज बोरा ने फैजुल्लागंज के प्रभावित परिवारों की समस्याएं रखते हुए सीवरेज व्यवस्था दुरुस्त करने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की आवश्यकता और विद्युत ट्रांसफॉर्मरों में सुधार का मुद्दा उठाया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ में पेयजल की उपलब्धता का आकलन कर आवश्यक प्रबंध करने पर जोर दिया। महापौर सुषमा खर्कवाल के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 6,500 घर प्रभावित हुए हैं और नगर निगम प्रशासन प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए चौबीसों घंटे तत्पर है।
प्रशासनिक आंकड़े इस आपदा की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, गोमती नदी का सामान्य जलस्तर 105.70 मीटर और चेतावनी स्तर 108.50 मीटर है, जबकि 8 अक्टूबर 2026 को नदी का जलस्तर बढ़कर 108.60 मीटर तक पहुंच गया था। फैजुल्लागंज का भू-स्तर नदी के सामान्य जलस्तर से लगभग चार मीटर नीचे होने के कारण 8.05 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 21 मोहल्लों के करीब 6,500 परिवार, यानी 38 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए। प्रशासन ने राहत एवं बचाव के लिए 16 बाढ़ राहत चौकियां और आठ आश्रय स्थल स्थापित किए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की 32वीं वाहिनी की सहायता से 106 नावों, 40 मोटरबोट और 19 स्टीमर के माध्यम से बचाव अभियान चलाया गया।
राहत सामग्री के वितरण में भी बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए। प्रशासन के मुताबिक, प्रभावित परिवारों के बीच 11,275 खाद्य किट, 67,800 लंच पैकेट और 1,18,500 लीटर पेयजल वितरित किया गया। स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत 28 डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल कर्मियों से युक्त 46 मेडिकल टीमों ने घर-घर पहुंचकर 8,591 मरीजों का उपचार किया। इस दौरान 12,291 मेडिसिन किट, 12 हजार ओआरएस पैकेट और 8,591 क्लोरीन टैबलेट बांटी गईं। आपातकालीन सहायता के लिए 14 एम्बुलेंस तथा पशुओं के उपचार के लिए दो पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए।
बाढ़ के बाद संक्रामक रोगों और मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए 11 ड्रोन, 172 बैकपैक मशीनों, पांच स्वीपिंग मशीनों और आठ ट्रैक्टर-टैंकरों से एंटी-लार्वा छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 11 टाटा एस माउंटेड मशीनों और 23 हैंड-हेल्ड मशीनों से फॉगिंग की जा रही है। क्षेत्र में 75 वाटर टैंकर, 36 मोबाइल शौचालय, 179 प्रकाश बिंदु और 135 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध कराए गए हैं। शिकायतों के निस्तारण के लिए टोल-फ्री नंबर 1077 वाला 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष और छह नियंत्रण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
फैजुल्लागंज के लिए घोषित परियोजनाएं अब केवल बाढ़ राहत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जलनिकासी, सीवरेज, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को एक व्यापक विकास योजना से जोड़ती हैं। तटबंध निर्माण और 12 पंपिंग स्टेशनों से लेकर नदी की गाद निकालने तक प्रस्तावित कार्यों का साझा लक्ष्य जलभराव के जोखिम को कम करना है। अब निर्णायक प्रश्न यह होगा कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है और क्या वे अगली अतिवृष्टि से पहले फैजुल्लागंज के हजारों परिवारों को स्थायी राहत दिला पाती हैं।