हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल राहत से आगे खींची दीर्घकालिक सुरक्षा की लकीर; तटबंध के साथ पंपिंग सिस्टम, दोहरे उपयोग वाले मार्ग और व्यापक सर्वे का खाका—बोले, हर साल की बाढ़ से स्थायी सुरक्षा सरकार का लक्ष्य

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।लखनऊ में गोमती की बाढ़ ने इस बार सरकार को केवल राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय नदी और आबादी के बीच स्थायी सुरक्षा-व्यवस्था खड़ी करने की चुनौती के सामने ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद पूरे नदी तट का विस्तृत सर्वे, तटबंध निर्माण और तटबंध के बाहर बसे क्षेत्रों से वर्षाजल की निकासी के लिए पंपिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि तटबंध बनने से गोमती के उफान से बड़ी आबादी को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकता है, लेकिन समाधान तभी पूरा होगा जब नदी के पानी के साथ बारिश के पानी की निकासी का भी स्थायी प्रबंध हो। यही वह बिंदु है जिसने मौजूदा बाढ़ को लेकर सरकार की रणनीति को तत्काल राहत से उठाकर दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की दिशा में पहुंचा दिया है।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की, रेस्क्यू अभियान में बचाए गए स्थानीय नागरिकों और एसडीआरएफ जवानों से संवाद किया तथा स्वास्थ्य शिविर में उपचार और दवाओं की उपलब्धता का जायजा लिया। यानी सरकार की प्राथमिकता एक साथ दो मोर्चों पर रही—इस समय पानी में फंसे परिवारों को सुरक्षित निकालना और अगली बार ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले स्थायी सुरक्षा-तंत्र तैयार करना। मुख्यमंत्री ने इसी दृष्टिकोण को प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बनाने के निर्देश दिए।

योगी ने कहा कि पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर सहित ऊपरी क्षेत्रों तथा नेपाल में हुई बारिश का पानी पांच-छह दिन बाद नीचे आने से गोमती का जलस्तर बढ़ा। बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक के क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले दस दिनों में प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में भारी बारिश के कारण विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ा है और कई वर्षों बाद अक्टूबर में गोमती में इस प्रकार की बाढ़ की स्थिति सामने आई है। ऐसे में सरकार ने मौजूदा संकट को भविष्य के लिए चेतावनी के रूप में लेते हुए स्थायी समाधान पर जोर दिया है।

सिर्फ तटबंध नहीं, पानी की पूरी निकासी का इंतजाम
सरकार की प्रस्तावित योजना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तटबंध को अकेले समाधान नहीं माना गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताया कि नदी का पानी रोकने के बाद तटबंध के बाहर बसे गांवों और आबादी में बारिश का पानी जमा रहा तो एक नई समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए वर्षाजल निकासी की समानांतर व्यवस्था तैयार करनी होगी। इसके लिए पंपिंग सेट लगाए जाने और पूरी कार्ययोजना शीघ्र तैयार कर स्वीकृत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने तटबंध को केवल बाढ़रोधी दीवार के रूप में विकसित करने के बजाय उसे दोहरे उपयोग वाली संरचना बनाने का संकेत दिया। उनके अनुसार जिस प्रकार लखनऊ विकास प्राधिकरण का ग्रीन कॉरिडोर सड़क के साथ सुरक्षा का काम भी करता है, उसी प्रकार तटबंध को भी आवागमन के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है। इससे बाढ़ नियंत्रण के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

राहत शिविरों में सिर्फ छत नहीं, गर्म भोजन और बच्चों के लिए दूध
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले अथवा असुरक्षित स्थान पर रात न बिताए। स्कूलों, मैरिज हॉल और अन्य सुरक्षित भवनों को राहत शिविर बनाया जाए। शिविरों में दोनों समय गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाए और जरूरत पड़ने पर लंगर की व्यवस्था की जाए। छोटे बच्चों के लिए दूध तथा गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
प्रभावित परिवारों को राशन किट में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर की दाल, एक लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, नमक, मिर्च और मसाले उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आवश्यकता के अनुसार बरसाती, बाल्टी, मोमबत्ती और माचिस भी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री के वितरण में पारदर्शिता और वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता देने को कहा है।
सांप के काटने से लेकर पशुओं के चारे तक—राहत का दायरा बढ़ा
बाढ़ के बाद बढ़ने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं के साथ एंटी-स्नेक वेनम और एंटी-रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। जलभराव के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने पशुधन को भी राहत अभियान का अभिन्न हिस्सा माना। प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त चारा, भूसा और चोकर उपलब्ध कराने तथा पशु चिकित्सा शिविर लगाने को कहा गया है। उनका निर्देश है कि बाढ़ के कारण पशुओं में उत्पन्न होने वाली बीमारियों का तत्काल उपचार हो और पशुधन की क्षति होने पर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मौत पर चार लाख, उजड़े आशियाने को आवास
बाढ़ या आकाशीय बिजली जैसी आपदा में जनहानि होने पर प्रभावित परिवार को नियमानुसार चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी परिवार का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है तो प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से नियमानुसार नया आवास उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सहायता में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
किसानों के लिए भी फसल क्षति का समयबद्ध सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के साथ फसलों के नुकसान का आकलन करने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।
राहत शिविरों में गए लोग निश्चिंत रहें, गांवों में पुलिस की रातभर निगरानी
मुख्यमंत्री ने बाढ़ के कारण राहत शिविरों में पहुंचे परिवारों के घरों और संपत्ति की सुरक्षा को भी प्रशासन की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने गांवों में चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान और पुलिसकर्मियों की रात्रि गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संकट का लाभ उठाकर चोरी अथवा किसी अन्य असामाजिक गतिविधि को अंजाम देने वालों पर प्रभावी निगरानी रखने को कहा गया है।
जहां बिजली उपलब्ध है, वहां राहत शिविरों में विद्युत आपूर्ति बनाए रखने और अन्य स्थानों पर पेट्रोमैक्स अथवा सोलर लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि राहत शिविर प्रभावित परिवारों के लिए केवल अस्थायी ठिकाना नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक आश्रय बनें।
राजनाथ सिंह ने भी ली जानकारी, तटबंध पर बनी सहमति
मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फोन पर लखनऊ की बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली और चिंता जताई। मुख्यमंत्री के अनुसार रक्षा मंत्री ने भी फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कार्य को आगे बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है और तत्काल धनराशि जारी कर कार्य प्रारंभ कराने की कार्रवाई की जाएगी।
‘डबल इंजन सरकार प्रभावितों के साथ खड़ी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में डबल इंजन सरकार मजबूती से बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। राहत और बचाव के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है और धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधियों से समन्वय के साथ काम करने को कहा।
लखनऊ की इस बाढ़ में मुख्यमंत्री के निर्देशों का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सरकार इस संकट को केवल कुछ दिनों की राहत के रूप में नहीं देख रही। फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध, उसके बाहर जलनिकासी के लिए पंपिंग सिस्टम और तटबंध को भविष्य में आवागमन के उपयोग से जोड़ने की योजना—ये तीनों मिलकर गोमती के किनारे बसे इलाकों के लिए एक दीर्घकालिक सुरक्षा मॉडल का आधार बन सकते हैं। अब निगाह इस बात पर होगी कि सर्वेक्षण और घोषणा के बाद यह योजना जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेती है।