योगी का बड़ा विजन—अगले पांच वर्षों में भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटी बनाने का लक्ष्य; 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्ट-अप का इकोसिस्टम विकसित करेगा उत्तर प्रदेश

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। कभी बेहतर करियर के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद की ओर देखने वाला उत्तर प्रदेश अब अपनी राजधानी लखनऊ को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एचसीएल आईटी सिटी लखनऊ के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर अगले पांच वर्षों में लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटी के रूप में स्थापित करने का संकल्प सामने रखा। उन्होंने एचसीएल के युवा प्रोफेशनल्स से इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया और कंपनी को भी इस दिशा में सहयोग का प्रस्ताव दिया। इसी अवसर पर एचसीएल आईटी सिटी के फेज-2 विस्तार का शिलान्यास और ‘इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर’ का उद्घाटन हुआ—यानी लखनऊ की आईटी यात्रा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक की अगली पारी में प्रवेश कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में कम से कम 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्ट-अप स्थापित करने, उन्हें मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए सशक्त नवाचार इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। प्रदेश सरकार इसके लिए पूर्ण सहयोग देने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आगामी 21 वर्षों में भारत को विकसित देशों की अग्रिम पंक्ति में पहुंचाने में युवा शक्ति की निर्णायक भूमिका होगी। इस लक्ष्य के केंद्र में वह प्रतिभा है, जिसे उत्तर प्रदेश अब अपने ही भूगोल में अवसर देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

HCL की पांच दशक की वैश्विक यात्रा और लखनऊ आईटी सिटी के दसवें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने संस्थापक शिव नाडर को बधाई देते हुए कहा कि एचसीएल की यात्रा उत्तर प्रदेश की धरती से शुरू हुई और आज वैश्विक पहचान बन चुकी है। दस वर्ष पहले लखनऊ में यह यात्रा नई दिशा में आगे बढ़ी थी। उस समय 100 युवाओं से शुरू हुआ परिसर आज करीब 12,000 युवाओं को रोजगार दे रहा है और एचसीएल का सबसे बड़ा कैंपस बन चुका है। योगी ने कहा कि एचसीएल के कर्मचारी अब केवल कंपनी के कर्मचारी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के ‘ब्रांड एंबेसडर’ भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश का युवा अपने ही प्रदेश में रहकर दुनिया के लिए तकनीक तैयार करता है, तो यह केवल रोजगार का विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत है। विशेष रूप से बेटियों की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की बेटियां सुरक्षित वातावरण में नाइट शिफ्ट तक कर रही हैं। किसी बेटी की करियर उड़ान उसके अकेले जीवन को नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार की आकांक्षाओं को नई दिशा देती है। यही बदलाव लखनऊ के तकनीकी परिसरों में दिखाई दे रहा है।

HCL के दस वर्ष को उन्होंने पिछली उपलब्धियों के उत्सव से आगे अगले सौ वर्षों की नींव मजबूत करने का अवसर बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार आने वाले दशक में लखनऊ केवल आईटी सर्विसेज का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग और डीप टेक का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके लिए उद्योग, सरकार और युवा प्रतिभा के बीच ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जो वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में उत्तर प्रदेश को अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर सके।
योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा कार्यशक्ति है। एचसीएल लखनऊ के दस वर्षों का विस्तार इसी क्षमता का प्रमाण है। उनके अनुसार, प्रदेश में अब रोजगार और अवसरों का भूगोल बदल चुका है। करीब नौ वर्ष में लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आधारभूत ढांचे में सुधार ने निजी क्षेत्र के लिए भी नया वातावरण तैयार किया है।
तकनीकी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बढ़ती हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की करीब 55 प्रतिशत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग अब प्रदेश में हो रही है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में योगदान करीब 60 प्रतिशत है। आईटी एवं आईटीईएस से प्रदेश का निर्यात एक दशक पहले लगभग 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये था, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इसे 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी करीब 3,800 करोड़ रुपये से बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा है और वर्ष 2030 तक इसे दो लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।
अब नोएडा ही उत्तर प्रदेश की तकनीकी अर्थव्यवस्था का एकमात्र केंद्र नहीं है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा में आईटी पार्क संचालित हैं, जबकि वाराणसी, बरेली, कानपुर और गोरखपुर में नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सात सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कार्यरत हैं। नई स्टार्ट-अप नीति के तहत नोएडा और लखनऊ को डीप टेक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। लखनऊ में एआई सिटी और व्यापक एआई इकोसिस्टम विकसित करने की योजना इस तकनीकी विस्तार का अगला चरण है।
मुख्यमंत्री ने एचसीएल की भूमिका को कारोबार से आगे सामाजिक विकास से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि कंपनी की पहलों के माध्यम से महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, बच्चों और ग्रामीण समुदायों तक विकास के कार्यक्रम पहुंचे हैं। पिछले 10-11 वर्षों में एचसीएल के कार्यक्रम प्रदेश के 50 लाख से अधिक लोगों और 3,000 से अधिक गांवों तक पहुंचे हैं। उनके अनुसार वास्तविक विकास तभी है, जब तकनीक का लाभ महानगरों से निकलकर किसान, ग्रामीण युवा, महिला और गांव के बच्चे तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि कभी डिजिटल इंडिया और जनधन खातों की अवधारणा पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन आज डीबीटी के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार डिजिटल तकनीक ने शासन और अर्थव्यवस्था को बदला है, उसी प्रकार एआई आने वाले वर्षों में विकास की दिशा बदलने वाली शक्ति बनेगा। लखनऊ को एआई इनोवेशन सिटी बनाने का लक्ष्य इसी भविष्य की तैयारी है।
कार्यक्रम को एचसीएल टेक की अध्यक्ष रोशनी नाडर मल्होत्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमिशन के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, शिव नाडर फाउंडेशन के अध्यक्ष शिखर मल्होत्रा सहित एचसीएल के अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।