
एनसीओआरडी की बैठक में जिलाधिकारी की सख्त हिदायत—अवैध शराब और मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान होगा तेज; ढाई हजार से अधिक मेडिकल दुकानों के मुकाबले 131 निरीक्षण पर जताई नाराजगी, ट्रेनों से लेकर शराब दुकानों तक निगरानी मजबूत करने के निर्देश

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।मादक पदार्थों और अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई की समीक्षा में प्रशासन ने अब केवल अभियान चलाने के बजाय उसकी प्रभावशीलता और विभागीय जवाबदेही पर निगाह केंद्रित कर दी है। शनिवार देर शाम कैंप कार्यालय स्थित सभागार में एनसीओआरडी (एनकार्ड) की बैठक में जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने अगस्त माह की कार्रवाई की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की रोकथाम में किसी स्तर पर शिथिलता नहीं होनी चाहिए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के नामित नोडल अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए, जबकि विभिन्न विभागों को निगरानी, निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने की हिदायत दी गई।
आबकारी विभाग की समीक्षा में अवैध एवं जहरीली शराब के विरुद्ध निरंतर जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने शराब की दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित जांच के साथ दुकानों के बाहर सड़क की ओर भी कैमरे लगाने को कहा, ताकि दुकान परिसर के साथ आसपास की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा सके। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में नाबालिग को शराब की बिक्री न हो। मादक पदार्थों और नशीली दवाओं के विरुद्ध भी सतत अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
औषधि विभाग की समीक्षा में सामने आया कि अप्रैल से अब तक केवल 131 मेडिकल दुकानों का निरीक्षण हुआ है, जबकि जनपद में ऐसी दुकानों की संख्या ढाई हजार से अधिक है। निरीक्षण के इस अनुपात पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल दुकानों की निगरानी को केवल अभिलेखीय निरीक्षण तक सीमित न रखते हुए सभी संचालकों को दुकान के भीतर और बाहर सड़क की ओर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। इससे औषधियों की बिक्री के साथ दुकानों के आसपास होने वाली गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा सकेगी।
बैठक में नशे की रोकथाम के लिए प्रवर्तन के साथ सामाजिक जागरूकता को भी अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग को विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम संचालित कराने के निर्देश दिए, ताकि छात्र-छात्राओं को शराब और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके। समाज कल्याण विभाग को नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने तथा नशामुक्ति से संबंधित गतिविधियों को सक्रिय रूप से संचालित करने को कहा गया।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के नामित नोडल अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी की अनुपस्थिति को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। बैठक में उनकी अनुपस्थिति ऐसे समय सामने आई, जब एनसीओआरडी के तहत विभिन्न विभागों की नशीले पदार्थों की रोकथाम संबंधी भूमिका और कार्रवाई की समीक्षा की जा रही थी।
रेल मार्ग से संभावित मादक पदार्थ तस्करी पर भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया। अगस्त में जीआरपी की कार्रवाई की समीक्षा के दौरान मादक पदार्थ अथवा नशीली दवाओं से संबंधित कोई प्रकरण सामने नहीं आने पर जिलाधिकारी ने ट्रेनों में आकस्मिक और गहन जांच अभियान चलाने को कहा। उन्होंने मादक पदार्थ, अवैध शराब और नशीली दवाओं की तस्करी के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे परिवहन के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों की प्रभावी निगरानी हो सके।
बैठक में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, अपर जिलाधिकारी प्रवेंद्र कुमार, समस्त उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।