राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार पांडे और महामंत्री सत्यनारायण भट्ट सहित शीर्ष पदाधिकारियों की उपस्थिति; जितेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्यपाल को भेंट की ‘अवध सम्पदा’, 800 विद्यार्थियों तक पहुंचा संस्कृत का संदेश, सैनिकों के साथ रक्षाबंधन मनाकर सामाजिक समरसता का दिया संदेश


दैनिक इंडिया न्यूज़ नई दिल्ली/नूरपुर (कांगड़ा), 31 अक्टूबर। संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत संवाहक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने और उसे नई पीढ़ी तथा समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाने के संकल्प के साथ संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सम्मेलन का हिमाचल प्रदेश में भव्य शुभारंभ हुआ। नूरपुर स्थित वीवीएम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, मलकवाल में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह में संस्कृत भारती के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेतृत्व की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश कुमार पांडे, राष्ट्रीय महामंत्री सत्यनारायण भट्ट, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्य प्रकाश बंसल, विद्यालय के चेयरमैन राकेश पठानिया तथा प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा की सहभागिता रही। संगठन मंत्री जयप्रकाश सहित अखिल भारतीय संगठन के अधिकारी, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय दायित्वधारी तथा विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम मे पूर्वी उत्तरप्रदेशक्षेत्र के संगठन मंत्री प्रमोद पंडित के कुशल प्रयास से क्षेत्र की सफल सहभागिता हुई।

इस राष्ट्रीय मंच पर अवध की साहित्यिक-सांस्कृतिक पहचान को विशेष स्थान तब मिला, जब संस्कृत भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय सम्पर्कप्रमुख एवं अवध प्रांत न्यास के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता को अवध प्रांत द्वारा प्रकाशित नवप्रकाशित पत्रिका ‘अवध सम्पदा’ की प्रति भेंट की। राज्यपाल ने पत्रिका को सहर्ष स्वीकार करते हुए स्नेहपूर्ण उद्गार व्यक्त किए और प्रकाशन के लिए शुभकामनाएं दीं। यह अवसर अवध की सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दृष्टि से उल्लेखनीय रहा।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार पांडे ने स्वागत संबोधन के दौरान संगठन की कार्यपद्धति, गतिविधियों और उपलब्धियों का परिचय दिया। इसके बाद राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं प्रबोधन के साथ भारतीय इतिहास की प्रामाणिक समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संस्कृत के प्रचार-प्रसार तथा भारतीय महापुरुषों के योगदान और ऐतिहासिक तथ्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उनका संबोधन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण तभी सार्थक है, जब उसका तथ्यपरक ज्ञान अगली पीढ़ी तक पहुंचे।

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्य प्रकाश बंसल ने महामंत्री सत्यनारायण भट्ट के साथ संस्कृत भाषा के विकास, महत्व और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने संस्कृत को भारतीय दर्शन, साहित्य, चिंतन और ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उद्घाटन सत्र के बाद सम्मेलन में विभिन्न प्रांतों की ओर से संस्कृत सप्ताह और वर्षभर संचालित गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया। इस क्रम में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अवध प्रांत की गतिविधियों का ब्यौरा रखते हुए भाषा के प्रचार-प्रसार, विद्यार्थियों के प्रबोधन और सामाजिक समरसता के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता से रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि 25 अगस्त 2026 को विशेष डाक टिकट के विमोचन से संबंधित कार्यक्रम के साथ वारियर्स डिफेंस कॉलेज में लगभग 800 छात्र-छात्राओं को संस्कृत भाषा बोधन कराया गया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा और उसकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया। शैक्षणिक संस्थान में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक संस्कृत का संदेश पहुंचाना अवध प्रांत की गतिविधियों का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
अवध प्रांत की दूसरी उल्लेखनीय पहल सैन्य प्रतिष्ठान में सामाजिक आत्मीयता का संदेश देने से जुड़ी रही। जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि 11 जीआर रेजिमेंटल सेंटर में संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं ने रक्षाबंधन पर्व पर सैनिकों को रक्षा-सूत्र बांधकर पर्व मनाया। इस आयोजन के माध्यम से संगठन ने संस्कृत सप्ताह को भाषायी गतिविधियों से आगे बढ़ाते हुए सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का प्रयास किया।
सम्मेलन में काशी प्रांत के शालिग्राम ने भी अपने प्रांत की गतिविधियों, आयोजनों और संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। विभिन्न प्रांतों की प्रस्तुतियों ने संगठन के कार्यक्षेत्र और संस्कृत को समाज के विविध वर्गों तक पहुंचाने के प्रयासों की व्यापक तस्वीर सामने रखी।
अखिल भारतीय सम्मेलन में प्रस्तुत विचारों और प्रांतीय गतिविधियों का केंद्रीय संदेश स्पष्ट रहा—संस्कृत का संवर्धन केवल भाषा के अध्ययन तक सीमित विषय नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का व्यापक दायित्व है। अवध प्रांत की शैक्षणिक और सामाजिक पहलें इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उदाहरण बनकर सम्मेलन में सामने आईं।