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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का उद्घोष: भातखण्डे केवल विश्वविद्यालय नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा है

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Dainik India News

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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का उद्घोष: भातखण्डे केवल विश्वविद्यालय नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा है

भातखण्डे के 100 वर्षों ने रचा भारतीय संस्कृति का वैश्विक अध्याय

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल आज भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के सौ गौरवशाली वर्षों की यात्रा को नमन करते हुए आयोजकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं संगीत साधकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

अपने प्रेरक संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि हिंदुस्तानी संगीत की विधिवत शिक्षा, साधना और उसके वैश्विक प्रचार-प्रसार में भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की भूमिका अतुलनीय रही है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल देश, बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय संगीत परंपरा का प्रतिनिधि बन चुका है। शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, मूल्यांकन और गौरवबोध का भी क्षण है।

राज्यपाल ने कहा कि देश के संगीत संसार में शायद ही कोई ऐसा मंच हो, जहाँ भातखण्डे से प्रशिक्षित कलाकारों की स्वर-साधना की गूँज न सुनाई देती हो। बीते सौ वर्षों में इस संस्थान ने असंख्य कलाकार, साधक और शिक्षाविद राष्ट्र को समर्पित किए हैं, जिनमें नौशाद, तलत महमूद, दिलराज कौर, अनूप जलोटा, पूर्णिमा पाण्डे, मालिनी अवस्थी, विधि नागर और आस्था गोस्वामी जैसे विशिष्ट नाम शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत की गरिमा को अंतरराष्ट्रीय ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

उन्होंने कहा कि संगीत और कला मानव जीवन को संस्कारित करने के साथ-साथ सौंदर्य, संतुलन और संवेदनशीलता प्रदान करती हैं। भारत विविध भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है, जहाँ अनेक धाराएँ मिलकर एकात्मता का महासागर रचती हैं। राज्यपाल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक चेतना का नवजागरण हो रहा है। काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले सांस्कृतिक सेतु के सशक्त उदाहरण हैं।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा भारतीय भाषाओं के संवर्धन हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मातृभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहन देना भारतीय संस्कृति के संरक्षण और विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय इस दिशा में सशक्त पहल कर रहे हैं, जिससे भारतीय भाषाओं का अध्ययन अब विद्यार्थियों तक सीमित न रहकर शिक्षक, कर्मचारी, अभिभावक एवं समाज के अन्य वर्गों तक विस्तारित हो रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत वह भूमि है जहाँ युग, समय और शासक बदलते रहे, किंतु देश की आत्मा और सांस्कृतिक एकता सदैव अडिग बनी रही। स्वतंत्रता के बाद देश के समक्ष सबसे बड़ा दायित्व अपनी हजारों वर्षों पुरानी विरासत को सुदृढ़ करना और विविधताओं से भरे समाज को एकता के सूत्र में पिरोना था। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हो सके, किंतु आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत करने के ठोस और प्रभावी प्रयास हो रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के 100 गौरवशाली वर्षों पर आधारित पुस्तकों “एक्यूप्रेशर एंड कथक डांस” एवं “भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय: एक संगीत यात्रा” का विमोचन किया गया। साथ ही संगीत संयोजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु एक शिक्षक को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित लोगो प्रतियोगिता के विजेता को सम्मानित किया गया तथा शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के चार प्रथम विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय की सौ वर्षों की सांगीतिक यात्रा पर आधारित वृत्तचित्र “स्वरों की विरासत” का भी अवलोकन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भातखण्डे की ऐतिहासिक परंपरा और संगीत साधना की गहराई से परिचित कराया।

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